मां की भक्ति में पूरा शहर, फर्ज निभाने में जुटे ये कर्मचारी! 12 घंटे की ड्यूटी

Ranchi:  दुर्गा पूजा के दौरान जब पूरा शहर पंडालों और पूजा घूमने में व्यस्त होगा, तब कई कर्मचारी और जवान अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगे. भीड़भाड़, सुरक्षा और व्यवस्था को संभालने के लिए इन्हें कई जगहों पर 12-12 घंटे की शिफ्ट में काम करना होगा. आम लोगों की पूजा और त्योहार सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से गुजरे, इसके लिए ये कर्मचारी अपने परिवार और निजी समय से दूर रहकर जिम्मेदारी निभाएंगे...
 

Ranchi:   दुर्गापूजा में जब पूरा रांची रोशनी से जगमगाएगा, सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ेगी और परिवार पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन के लिए निकलेंगे, तब शहर के कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो त्योहार का आनंद लेने के बजाय अपनी ड्यूटी निभा रहे होंगे। किसी के कंधों पर ट्रैफिक संभालने की जिम्मेदारी होगी, कोई सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहेगा, तो कोई शहर की सफाई, स्वास्थ्य सेवा या आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेगा।

दुर्गापूजा के दौरान रांची पुलिस, ट्रैफिक जवान, सफाईकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस कर्मियों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। भीड़ बढ़ने के साथ उनकी ड्यूटी के घंटे और चुनौतियां भी बढ़ती हैं। कई कर्मचारी और जवान लगातार कई-कई घंटे काम करते हैं, ताकि पूजा घूमने निकले लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिल सके।

जब रांची की सड़कों पर बढ़ेगी भीड़, ट्रैफिक जवान संभालेंगे मोर्चा

दुर्गापूजा के दौरान रांची के प्रमुख पूजा पंडालों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर वाहनों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी सबसे अहम हो जाती है। जवानों को चौराहों, पंडालों के आसपास और प्रमुख मार्गों पर लगातार तैनात रहना पड़ता है।

लोग जहां कुछ देर रुककर पंडाल की सजावट और रोशनी का आनंद लेते हैं, वहीं ट्रैफिक जवान घंटों सड़क पर खड़े रहकर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करते हैं। भीड़ के बीच एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी वाहनों के लिए रास्ता उपलब्ध कराना भी उनकी बड़ी जिम्मेदारी होती है।

सुरक्षा व्यवस्था में पुलिसकर्मियों की भी बढ़ जाती है जिम्मेदारी

पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकलते हैं। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं रहती। भीड़ प्रबंधन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, पूजा पंडालों के आसपास निगरानी और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई जैसी कई जिम्मेदारियां पुलिसकर्मियों को निभानी पड़ती हैं।

जब शहर के लोग देर रात तक पंडाल घूम रहे होते हैं, तब पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहकर लगातार व्यवस्था पर नजर रखते हैं। अधिक भीड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।

आधी रात के बाद भी जारी रहता है सफाईकर्मियों का काम

दुर्गापूजा के दौरान सड़कों, पंडालों और बाजारों में लोगों की भीड़ बढ़ने के साथ कचरा भी तेजी से बढ़ता है। खाने-पीने की दुकानों और पूजा पंडालों के आसपास डिस्पोजेबल सामान, प्लास्टिक, कागज और अन्य कचरे की मात्रा बढ़ जाती है।

जब ज्यादातर लोग पूजा घूमकर अपने घर लौट चुके होते हैं, तब सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी शुरू होती है। सड़कों की सफाई, कचरा उठाना और सार्वजनिक स्थानों को अगले दिन के लिए तैयार करना उनकी ड्यूटी का हिस्सा होता है।

त्योहार के दौरान शहर को साफ-सुथरा बनाए रखना आसान काम नहीं होता। इसके लिए सफाईकर्मियों को कई बार देर रात तक काम करना पड़ता है।

अस्पताल और एंबुलेंस कर्मियों को भी रहना पड़ता है अलर्ट

दुर्गापूजा के दौरान किसी दुर्घटना, अचानक तबीयत बिगड़ने या अन्य आपात स्थिति में अस्पताल और एंबुलेंस सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों और एंबुलेंस कर्मचारियों के लिए त्योहार के दिनों में भी छुट्टी जैसी स्थिति नहीं होती।

जब लोग परिवार के साथ पंडाल घूम रहे होते हैं, उस समय डॉक्टर, नर्स और अस्पताल के दूसरे कर्मचारी मरीजों की देखभाल में जुटे रहते हैं। वहीं, किसी आपात स्थिति की सूचना मिलते ही एंबुलेंस कर्मियों को तुरंत मौके पर पहुंचना होता है।

पंडालों के बीच फायर ब्रिगेड की टीम भी रहती है तैयार

दुर्गापूजा के दौरान बड़े-बड़े पंडाल, बिजली की सजावट, अस्थायी ढांचे और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण अग्नि सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। फायर ब्रिगेड की टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना पड़ता है।

लोगों के लिए पंडाल की रोशनी और सजावट जहां उत्सव का हिस्सा होती है, वहीं सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए यही व्यवस्था लगातार निगरानी का विषय होती है। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए उन्हें तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहना पड़ता है।

12-12 घंटे की ड्यूटी के बीच भी निभाएंगे अपनी जिम्मेदारी

दुर्गापूजा के दौरान शहर की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कई विभागों के कर्मचारियों और जवानों को लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ सकता है। कई जगहों पर 12-12 घंटे की ड्यूटी की जिम्मेदारी भी सामने आती है।

इसका मतलब यह है कि जब परिवार के लोग पूजा की तैयारी करेंगे, पंडाल घूमने निकलेंगे और दोस्तों के साथ त्योहार का आनंद लेंगे, तब बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे।

आपकी सुरक्षित पूजा के पीछे है इनका फर्ज

दुर्गापूजा सिर्फ पंडाल, रोशनी और उत्सव का नाम नहीं है। इस पूरे आयोजन के पीछे बड़ी संख्या में ऐसे लोग काम करते हैं, जो त्योहार के दिनों में भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटते।

जब परिवार पूजा घूमने निकलते हैं, तब पुलिसकर्मी सड़क पर, ट्रैफिक जवान चौराहों पर, सफाईकर्मी सड़कों पर, स्वास्थ्यकर्मी अस्पतालों में और फायर ब्रिगेड की टीमें आपात स्थिति के लिए तैयार रहती हैं।

इन लोगों के लिए भी दुर्गापूजा खुशी और परिवार के साथ समय बिताने का मौका हो सकता है, लेकिन ड्यूटी के दौरान उनका फर्ज सबसे पहले होता है। यही वजह है कि इस दुर्गापूजा में जब आप खूबसूरत पंडालों और रोशनी का आनंद लें, तो उन लोगों को भी जरूर याद करें, जो आपकी खुशी और सुरक्षा के लिए अपना त्योहार ड्यूटी पर बिताते हैं।