इन महिलाओं का कमाल..बंजर जमीन को बना दिया उपजाऊ, जमीन के बारे में जानकारी इकट्ठा किया फिर संगठन से संपर्क स्थापित कर अपने खेत की जमीन को कर डाला हरा भरा...
Hazaribagh: हजारीबाग के सुदूरवर्ती कटकमसांडी प्रखंड के हरहद गांव की 11 महिलाओं का समूह खुद के लिए जैविक (ऑर्गेनिक) खाद बना रहा है. वे यह संदेश दे रही हैं कि हर एक किसान को जैविक खाद का ही उपयोग करना चाहिए...
Jan 13, 2026, 20:08 IST
Hazaribagh: खेत की जमीन बंजर हो जाने के बाद महिलाओं ने बीड़ा उठाया कि क्यों न बंजर जमीन को जीवित किया जाए. महिलाओं ने अध्ययन किया, संगठन से संपर्क स्थापित किया और फिर अपने खेत की जमीन को हरा भरा कर डाला.
रसायनिक खाद जमीन बंजर बना देती हैः महिला किसान
आधी आबादी हर एक क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. हजारीबाग के सुदूरवर्ती कटकमसांडी प्रखंड के हरहद गांव की 11 महिलाओं का समूह खुद के लिए जैविक (ऑर्गेनिक) खाद बना रहा है. वे यह संदेश दे रही हैं कि हर एक किसान को जैविक खाद का ही उपयोग करना चाहिए. क्योंकि रसायनिक खाद जमीन बंजर बना देती है. जैविक खाद जमीन को नई जिंदगी देती है.
महिलाओं का कहना है कि दरअसल खेत रसायनिक खाद के उपयोग से बंजर हो गया था. कहा कि उनके परिवार वाले पिछले कई सालों से खेती करते आ रहे हैं. जानकारी के अभाव में रसायनिक खाद का उपयोग करते थे. अत्यधिक खाद उपयोग करने से वह जमीन बंजर हो गई थी. उत्पादन भी शून्य हो गया था. इस कारण जमीन ऐसे ही पड़ी रहती थी. इसके बाद लीड संस्था से संपर्क स्थापित किया गया. वहां के लोग उन्हें कई जगह ले गये. बताया गया कि जैविक खाद के उपयोग से बंजर जमीन फिर से जीवित की जा सकती है. वहीं से सिलसिला शुरू हुआ और अभी 10 एकड़ जमीन के लिए जैविक खाद तैयार किया जा रहा है.
महिलाओं ने जैविक खाद के बताए फाएदे
महिलाओं का कहना है कि जैविक खाद का उपयोग करने से दो फायदे हुए हैं. पहला जमीन फिर से उपजाऊ हो गई है और दूसरा फायदा यह है कि रसायनिक खाद में जो पैसा लगता था वह भी बच रहा है. उनका कहना है कि गांव में हर एक घर में गोबर रहता है. उसी गोबर के उपयोग से अलग-अलग तरह के जैविक खाद तैयार किए जा रहे हैं. खाद बनाने में किसी भी तरह का खर्च नहीं होता है.
महिलाओं को लीड संस्था की ओर से मदद की जा रही है. प्रोजेक्ट मैनेजर आलोक वर्मा ने बताया कि महिलाओं को जैविक खेती के बारे में पहले जानकारी दी गई और फिर जैविक खाद और जैविक दवा बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. अब महिलाएं खुद से जैविक खाद और दवा दोनों बन रही हैं जिससे उन्हें खेती में काफी मदद मिल रही है.
सामूहिक भागीदारी एक नया अध्याय लिख रही है
प्रशिक्षण के लिए महिलाओं को कई जगह ले जाया भी गया, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर देखा कि कैसे जैविक खाद से लाभ होता है. महिलाएं जहां 10 एकड़ जमीन में खेती कर रही हैं वहां जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उनकी पैदावार बढ़ी है.
महिलाओं की मेहनत रंग लाई है और अब बंजर जमीन हरी भरी हो गई है. महिलाओं ने अब समझ लिया है कि जैविक खाद खेती के लिए महत्व रखता है और बंजर जमीन को भी यह हरा भरा कर देता है. महिलाओं की सामूहिक भागीदारी आज एक नया अध्याय लिख रही है.