6,450 करोड़ का तृतीय अनुपूरक बजट: झारखंड के गांवों में विकास की नई इबारत, पंचायतों को 605 करोड़ की ऐतिहासिक ताकत
मंत्री ने कहा कि पहली बार स्टेट फाइनेंस कमीशन की अनुशंसा पर पंचायतों के लिए 605 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसे ग्राम स्वशासन को वास्तविक मजबूती देने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया गया। उनका कहना है कि अब विकास योजनाएं फाइलों से निकलकर धरातल पर दिखेंगी और गांव-गांव तक पहुंचेंगी।
बजट प्रावधानों पर नजर डालें तो ग्रामीण कार्य विभाग को 1,717.58 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आवंटित की गई है। इससे ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी। दूरदराज और पिछड़े इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।
पंचायती राज विभाग के लिए 658 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पंचायतों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं ग्रामीण विकास विभाग को 594.88 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि से ग्रामीण आजीविका मिशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण और गरीब परिवारों के उत्थान कार्यक्रमों को नई रफ्तार मिलेगी।
सरकार का दावा है कि यह बजट सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन प्रावधानों का असर गांवों की जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देता है।