झारखंड में ट्रेजरी घोटालों की परतें खुलनी शुरू, जांच एजेंसियों को नए पशुपालन घोटाले जैसी साजिश की आशंका

Ranchi: इस मामले की जानकारी मिलने के बाद रांची डीसी के आदेश पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है. जिसमें दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है. दोनों से कोतवाली थाना में पूछताछ की जा रही है. डीसी ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार कांके स्थित एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन में कार्यरत दो कर्मियों ने वेतन मद की राशि में हेरफेर कर 3 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी की है.
 

Ranchi: झारखंड में ट्रेजरी से जुड़े घोटालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता पैदा हो गई है. हाल के महीनों में अलग-अलग जिलों की ट्रेजरी से संदिग्ध भुगतान, फर्जी बिल, और नियमों को ताक पर रखकर की गई निकासी के मामले सामने आए हैं. इन खुलासों ने उस दौर की याद दिला दी है, जब पशुपालन विभाग के नाम पर सरकारी खजाने की बड़े पैमाने पर लूट हुई थी. हजारीबाग और बोकारो में पुलिस वेतन में हुए घोटाले के बाद अब रांची के पशुपालन विभाग में भी करोड़ों की अवैध निकासी का मामला सामने आया है. रांची डीसी के आदेश पर इस मामले में रांची के कोतवाली थाना में एफआईआर दर्ज की गई है.

पशुपालन ट्रेजरी से 3 करोड़ 40 लाख से ज्यादा की अवैध निकासी

चारा घोटाले के बाद अब एक बार फिर से रांची में पशुपालन विभाग में घोटाला सामने आया है. विभाग के कुछ कर्मचारियों के द्वारा ट्रेजरी से 3 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी की गई है.

इस मामले की जानकारी मिलने के बाद रांची डीसी के आदेश पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है. जिसमें दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है. दोनों से कोतवाली थाना में पूछताछ की जा रही है. डीसी ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार कांके स्थित एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन में कार्यरत दो कर्मियों ने वेतन मद की राशि में हेरफेर कर 3 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी की है. रांची डीसी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कार्यकारी मजिस्ट्रेट मो. जफर के लिखित आवेदन पर एफआईआर दर्ज की गई है.

क्या है एफआईआर में

एफआईआर में बताया गया है कि विभाग के दो कर्मियों के द्वारा (दोनों फिलहाल हिरासत में) साल 2023 से लेकर 2026 तक कुबेर पोर्टल में छेड़छाड़ करके अपने मूल वेतन में अवैध रूप से बढ़ोतरी दिखाते हुए ट्रेजरी से अवैध निकासी की गई. ये मामला सामने आने के बाद रांची डीसी के द्वारा भी इंटरनल जांच करवाई गई, उसमें भी घोटाले की पुष्टि हुई है.

क्या फिर दोहराया जा सकता है इतिहास?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ट्रेजरी घोटालों का यह सिलसिला राज्य के लिए एक और बड़े आर्थिक घोटाले का रूप ले सकता है। पशुपालन घोटाले ने जिस तरह झारखंड-बिहार की राजनीति और प्रशासन को वर्षों तक प्रभावित किया था, वैसी ही स्थिति दोबारा बनने की आशंका जताई जा रही है।

आगे क्या?

फिलहाल निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस बार शुरुआती स्तर पर ही घोटालों पर लगाम लगाई जाएगी, या फिर मामला बढ़ते-बढ़ते एक और ऐतिहासिक घोटाले का रूप ले लेगा। आने वाले दिन झारखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं