कुँड़ुख़ भाषा में पीएचडी शोध में गड़बड़ी, आदिवासी महासभा के शिष्टमंडल ने राज्यपाल से की शिकायत

 

रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के अंतर्गत कुँड़ुख़ भाषा विभाग में पीएचडी शोध की अनियमितताओं को लेकर आदिवासी महासभा के समन्वयक देव कुमार धान के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने आज राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से राज भवन में मुलाकात की।

शिष्टमंडल ने राज्यपाल का ध्यान इस ओर दिलाया कि कुँड़ुख़ भाषा में पीएचडी शोध कार्य में गड़बड़ियाँ बढ़ रही हैं, जिससे भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास लेखन में गंभीर गलतियाँ सामने आ रही हैं। उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि कुँड़ुख़ भाषा में शोध करने वाले विद्यार्थियों को गाइड या पर्यवेक्षक के रूप में ऐसे शिक्षक दिए जा रहे हैं, जिनकी विशेषज्ञता मुंडारी भाषा में है और जिन्हें कुँड़ुख़ भाषा का उचित ज्ञान नहीं है।

इस स्थिति को सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिष्टमंडल ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने पीएचडी शोध निबंधन को रद्द करने और दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की अपील की, ताकि भविष्य में शोध की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके।