रांची रेलवे स्टेशन कब बनेगा पूरी तरह हाईटेक? नई सुविधाएं और काम की मौजूदा स्थिति
राजधानी के रांची रेलवे स्टेशन का करीब 447 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है. परियोजना के तहत स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने के साथ यात्रियों की आवाजाही, ठहरने और पार्किंग की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर है. प्रस्तावित सुविधाओं में नई स्टेशन बिल्डिंग, लिफ्ट, एस्केलेटर, वेटिंग एरिया, फूड प्लाजा, डॉरमेट्री और बेहतर यात्री सुविधाएं शामिल हैं.
Ranchi: दुर्गा पूजा के दौरान रेलवे स्टेशन पर बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रांची रेलवे स्टेशन के दक्षिणी छोर पर स्थित साउथ गेट को अस्थायी रूप से खोल दिया गया है। करीब 447 करोड़ रुपये की लागत से चल रही स्टेशन पुनर्विकास परियोजना के बीच रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए यहां अतिरिक्त टिकटिंग व्यवस्था भी शुरू की है। इसका उद्देश्य मुख्य प्रवेश द्वार पर भीड़ का दबाव कम करना और यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने का एक अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध कराना है।
साउथ गेट खुलने से खासकर प्लेटफॉर्म संख्या छह से ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। दक्षिणी प्रवेश द्वार से इस प्लेटफॉर्म तक सीधी कनेक्टिविटी होने के कारण यात्रियों को मुख्य गेट की ओर जाने की जरूरत कम पड़ सकती है। हालांकि, त्योहार के दौरान इस व्यवस्था से कितनी राहत मिलती है, यह यात्रियों की आवाजाही और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
साउथ गेट पर टिकट काउंटर और मशीनें चालू
दक्षिणी टर्मिनल पर यात्रियों की सुविधा के लिए दो टिकट बुकिंग काउंटर शुरू किए गए हैं। इसके अलावा चार ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीनें (ATVM) लगाई गई हैं। अनारक्षित टिकट लेने में सहायता के लिए मोबाइल UTS सहायकों की व्यवस्था भी की गई है। इससे टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों के सामान की जांच के लिए स्कैनिंग मशीन भी लगाई गई है। त्योहार के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे के लिए महत्वपूर्ण होगा।
एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस होगा स्टेशन
रांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पुनर्विकास परियोजना के तहत कई यात्री सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें आधुनिक प्रतीक्षालय, एसी वेटिंग हॉल, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया और एग्जीक्यूटिव लाउंज जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
यात्रियों के ठहरने के लिए 100 बेड की डॉरमेट्री बनाने की योजना है। इसमें महिला और पुरुष यात्रियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अलावा स्वच्छ शौचालय, शिशु को दूध पिलाने के लिए अलग कक्ष और दुकानें विकसित करने की भी योजना है।
लिफ्ट, एस्केलेटर और पार्किंग पर भी जोर
स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इनसे बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वाले लोगों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है। पार्किंग, प्रवेश-निकास मार्ग और डिजिटल डिस्प्ले व्यवस्था को बेहतर बनाना भी परियोजना का हिस्सा है। स्टेशन परिसर में निगरानी और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
परियोजना के विवरण के अनुसार, पुनर्विकास के बाद स्टेशन को एक समय में 35 हजार से अधिक यात्रियों को संभालने योग्य बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, इस क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल भवन निर्माण के साथ संपर्क मार्गों, पार्किंग और प्लेटफॉर्म तक पहुंच की व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा।
दिसंबर 2026 तक दक्षिणी टर्मिनल पूरा करने का लक्ष्य
फिलहाल साउथ टर्मिनल को दुर्गा पूजा के मद्देनजर अस्थायी रूप से खोला गया है। यहां कुछ जरूरी सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं, जबकि पुनर्विकास का काम अभी जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दक्षिणी टर्मिनल का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह के अनुसार, रेल मंत्रालय के निर्देशों के तहत यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम चल रहा है। दुर्गा पूजा को देखते हुए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और साउथ टर्मिनल को अस्थायी तौर पर खोला गया है। उन्होंने कहा कि पुनर्विकास का काम पूरा होने के बाद यात्रियों को नई सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
यात्रियों को कितनी मिलेगी राहत?
साउथ गेट खुलने, अतिरिक्त टिकट काउंटर शुरू होने और एटीवीएम लगाने से त्योहार के दौरान यात्रियों को राहत मिलने की संभावना है। लेकिन स्टेशन की आधुनिकता का वास्तविक आकलन इस आधार पर होगा कि टिकट लेने, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने, साफ-सफाई बनाए रखने और ट्रेन में चढ़ने-उतरने में यात्रियों को कितनी आसानी होती है।
करीब 447 करोड़ रुपये की इस परियोजना से रांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि निर्माण कार्य कब पूरा होता है और प्रस्तावित सुविधाएं नियमित रूप से कब उपलब्ध हो पाती हैं।