खतरे में पलामू टाइगर रिजर्व के वन्यजीव, बिहार में मिले पीटीआर के तेंदुआ और हिरण की खाल...

Palamu: 19 जनवरी को बिहार के मुजफ्फरपुर में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो बिहार के वन विभाग एवं पलामू टाइगर रिजर्व की एक टीम ने बड़ी कार्रवाई की...
 
Palamu: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके पर वन्यजीवों के शिकार पर इंटरनेशनल रैकेट की नजर है. वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, पलामू टाइगर रिजर्व एवं वन विभाग विंग के कार्रवाई में पिछले दो महीने में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
19 जनवरी को बिहार के मुजफ्फरपुर में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो बिहार के वन विभाग एवं पलामू टाइगर रिजर्व की एक टीम ने बड़ी कार्रवाई की.
इस दौरान टीम ने तेंदुआ एवं हिरण की खाल बरामद को किया था जबकि चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए आरोपियों में बिहार के एक बड़े राजनीतिक हस्ती का रिश्तेदार भी शामिल है. बरामद तेंदुआ एवं हिरण की खाल का संबंध पलामू टाइगर रिजर्व से है.
बिहार के बाद झारखंड के कई हिस्सों में वन्य जीव के शिकार से जुड़े मामले में छापेमारी हुई है. छापेमारी में इंटरनेशनल रैकेट और तस्कर गिरोह का नेटवर्क मिला है.
पलामू टाइगर रिजर्व में यह जांच की जा रही है कि मुजफ्फरपुर में बरामद तेंदुआ और हिरण की खाल के लिए शिकार कब हुआ है?
इसमें स्थानीय स्तर पर कौन कौन से लोग शामिल हैं. यह नेटवर्क बाघ, तेंदुआ, हिरण, पैंगोलिन, रेड सैंड बोआ की तस्करी कर रहा है. यह गिरोह सांप के जहर से लेकर वन्य जीव के अंग तक को बेच रहा है. बिहार में बरामद तेंदुआ की खाल को करोड़ों में बेचा जाना था.
बिहार में मिली तेंदुआ एवं हिरण की खाल का संबंध पलामू टाइगर रिजर्व से बताया जा रहा है. पूरे मामले में कार्रवाई के साथ-साथ जांच भी की जा रही है. कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है और नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई किया गया है. पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए भी जा रहे हैं. बड़ी संख्या में कार्रवाई हुई है शिकारी पकड़े गए हैं हथियार बरामद हुए हैं. -प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पलामू टाइगर रिजर्व.
चीन और साउथ-ईस्ट एशिया तक फैला वन्य जीवों की तस्करी का नेटवर्क
अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच पलामू टाइगर रिजर्व वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एवं वन्य विभाग ने झारखंड के कई हिस्सों में वन्य जीव के तस्करी के खिलाफ कार्रवाई किया.
इन कार्रवाई में कई बड़े खुलासे हुए हैं. कार्रवाई के दौरान यह जानकारी निकलकर सामने आई है कि शिकारियों को नेटवर्क चीन और साउथ ईस्ट एशिया तक फैला हुआ है.
पिछले छह महीने में 39 शिकारी पकड़े गए हैं जबकि 50 से अधिक हथियार बरामद हुए है. इस दौरान रेड सैंड बोआ एवं करोड़ों के सांप के जहर भी बरामद हुए है.
पलामू टाइगर रिजर्व से कौन से रुट से होती है वन्य जीव की तस्करी
पलामू टाइगर रिजर्व की सीमा छत्तीसगढ़, पलामू, गढ़वा एवं लातेहार में फैली हुई है. पलामू की इलाके से रेल एवं सड़क के कनेक्टिविटी आसान है. पलामू टाइगर रिजर्व से वन्य जीव की तस्करी के बाद कोलकाता, वाराणसी और बिहार के इलाके में ले जाया जाता है.
वाराणसी एवं बिहार के इलाके से नेपाल जबकि कोलकाता के इलाके से वन्य जीव को बांग्लादेश में तस्करी की जाती है. नेपाल के रास्ते वन्य जीव चिंतक जाते हैं जबकि बांग्लादेश के रास्ते वन्य जीव साउथ ईस्ट एशिया तक जाती है.
गुड लक एवं मेडिकल के लिए करोड़ों में बिकती है वन्य जीवों के अंग
भारत, चीन, साउथ एशिया में अंधविश्वास, मेडिसिन समेत कई मामलों को लेकर वन्य जीव कैसे के अंगों का करोड़ों में कारोबार होता है.
झारखंड में बरामद रेट सेंड हुआ को साउथ ईस्ट एशिया में करोड़ों में बेचा जाना था. इसी तरह पैंगोलिन के स्कल एवं सांप के जहर का इस्तेमाल मेडिसिन के लिए होता है. जबकि बाघ एवं तेंदुआ के अंग का इस्तेमाल अंधविश्वास के लिए किया जाता है.