क्या RJD और Congress का हेमंत बनेंगे सहारा? सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, "हारे का सहारा, हेमन्त हमारा."
Jharkhand Desk: बिहार विधानसभा चुनाव और घाटशिला उपचुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं. घाटशिला उपचुनाव में झामुमो को भारी जीत मिली, वहीं बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन को भारी जीत मिली, जबकि कांग्रेस-राजद को करारी हार का सामना करना पड़ा. अब झारखंड की राजनीति में यह बहस गरमा गई है कि क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस, राजद और भाकपा (माले) जैसे अपने गठबंधन सहयोगियों के व्यवहार की समीक्षा करेगा, या समय के साथ झामुमो का रुख नरम पड़ेगा?
झारखंड की राजनीति में यह सवाल इसलिए खासा गरम है क्योंकि दो दिन पहले झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा था, "हारे का सहारा, हेमन्त हमारा." अब सवाल यह उठता है कि क्या हेमंत सोरेन बिहार चुनाव हारे राजद और कांग्रेस का झारखंड में सहारा बनेंगे?
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस द्वारा झामुमो को तरजीह न दिए जाने से नाराज हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर की थी और विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन दलों के व्यवहार की समीक्षा की बात कही थी. अब जब सुप्रियो 'हारे का सहारा, हेमन्त हमारा' की बात करते हैं, तो केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे कहते हैं कि समीक्षा तो होगी, लेकिन उसमें फैसला क्या होगा, ये उनके नेता हेमंत सोरेन को तय करना है.
वहीं इस मामले पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि महागठबंधन में ऑल इज वेल है. समीक्षा एक सामान्य बात है, लेकिन भाजपा चाहती है कि गठबंधन में दरार हो, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला. सुप्रियो द्वारा हेमंत को 'हारे का सहारा, हेमंत हमारा' कहने वाले बयान पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आई. भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की बातों को उसके सहयोगी दल कांग्रेस और राजद कहां मान रहे हैं? जेएमएम भी कई तरह की बातें कह रहा है. वे बिहार में चुनाव भी लड़ना चाहते थे, जब उन्हें तवज्जो नहीं मिली तो वे नाराज हो गए और समीक्षा की बात करने लगे, अब वे हारे हुए का सहारा बनना चाहते हैं.