असम में झामुमो की एंट्री से बदलेगा खेल? पहली बार मैदान में उतरी झारखंड मुक्ति मोर्चा, सीएम हेमंत सोरेन ने किया जोरदार कैंपेन, झोंक दी अपनी पूरी ताकत...
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक विस्तार का संकेत दिया है. यह कदम पार्टी के लिए झारखंड से बाहर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इस अभियान में हेमंत सोरेन ने खुद सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने असम के कई इलाकों में रैलियां और जनसभाएं कीं,
JMM In Assam झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक विस्तार का संकेत दिया है. यह कदम पार्टी के लिए झारखंड से बाहर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
इस अभियान में हेमंत सोरेन ने खुद सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने असम के कई इलाकों में रैलियां और जनसभाएं कीं, खासकर उन सीटों पर जहां आदिवासी और चाय बागान मजदूरों की आबादी अधिक है. ये वर्ग JMM का पारंपरिक आधार माने जाते हैं.
जेएमएम ने असम के कुल 126 सीटों में से 17 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. जिसे लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी असम में धुंआधार जनसभा की. खुद सीएम हेमंत सोरेन पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में लगातार चुनाव प्रचार कर रहे थे और लोगों के बीच जाकर अपने प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील कर रहे थे. इस चुनावी सभा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने भी अपनी पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार किया.
पहली बार झारखंड से बाहर किसी राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा इतनी गंभीरता से चुनाव लड़ता दिखा है. झारखंड में सत्ता की सहयोगी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं हो पाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम के 21 विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार उतारने के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी.
हालांकि, स्क्रूटनी में झामुमो के तीन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए थे और पार्टी के केंद्रीय महासचिव के शब्दों में एक अन्य उम्मीदवार को भी सिंबल के रूप में तीर धनुष नहीं मिला. जिसके बाद अब झामुमो के कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. जिस पर पार्टी की खास नजर बनी हुई है.
जेएमएम ने 21 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी, हालांकि 17 सीटों पर ही उसके उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. जिन 21 सीटों पार्टी ने प्रत्याशियों की सूची जारी की थी, वहां बंपर वोटिंग हुई है. उन सभी सीटों पर वोटिंग परसेंटेज इस प्रकार हैं.
- भेरगांव- 81.72
- मजबत - 83.42
- बरचल्ला - 82.62
- रंगापारा- 83.49
- बिस्वनाथ- 83.93
- रोंगोनदी- 87.65
- डूमडूमा- 80.38
- मार्गेरिटा-78.43
- दिगबोई- 78.37
- मकुम- 80.65
- चाबुआ-लाहोवल- 81.41
- खोवांग- 82.55
- दुलियाजान- 79,71
- टिंगखोंग- 80.12
- नहरकटिया- 78.81
- सोनारी- 82.36
- टिटाबोर- 80.70
- खुमतई- 83.54
- सरुपाथर-77.38
- बोकाजन- 77.35
11 दिनों तक सीएम हेमंत सोरेन की ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस बार असम विधानसभा चुनाव कितनी गंभीरता से लड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 28 मार्च से चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यानी 07 अप्रैल तक असम में डेरा डाले रहे. वे अपनी पूरी टीम के साथ असम में रहकर झामुमो के उम्मीदवारों के पक्ष में लगातार चुनावी सभाएं की और पार्टी नेताओं के साथ बैठक भी की.
इस दौरान मुख्यमंत्री और झामुमो सुप्रीमो हेमंत सोरेन ने तिंगखोर, सरूपथार सहित कई विधानसभा क्षेत्रों में झामुमो प्रत्याशी के लिए चुनावी सभाएं की. इस दौरान असम के टी ट्राइब, चाय बागान के मजदूरों की मजदूरी, राज्य के श्रमिकों और जनता के मुद्दे उठाते हुए झामुमो को वोट देने की अपील की थी.
झामुमो ने पहली बार 17 सीटों पर उतारे उम्मीदवार
मुख्यमंत्री और झामुमो के अध्यक्ष हेमंत सोरेन के अलावा उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, जोबा मांझी, विधायक एमटी राजा, केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, विनोद पांडेय सहित 20 स्टार प्रचारक पहली बार झामुमो के प्रत्याशी के लिए अलग-अलग जिलों में कैंप कर झामुमो प्रत्याशियों के पक्ष में जनसंपर्क, चुनावी जनसभाएं और बैठक करते रहे.
इस चुनावी सभा में झामुमो ने असम के टी ट्राइब, चाय बागान, आदिवासी के परेशानियों पर खास फोकस रहा. हालांकि चुनावी परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि इन मुद्दों का असम की जनता पर कितना असर पड़ा. बता दें कि असम में कुल 126 विधानसभा सीट हैं, जिसमें 17 सीटों पर झामुमो ने पहली बार उम्मीदवार उतारे हैं.