बारिश के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम! झारखंड में सड़क निर्माण पर नया संकट
Ranchi: झारखंड में ग्रामीण इलाकों को पक्की सड़कों से जोड़ने वाली योजनाएं इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही हैं। लगातार तीन महीने तक हुई मानसूनी बारिश के कारण पहले ही सड़क निर्माण कार्य प्रभावित रहे। अब बारिश थमने और निर्माण कार्य के लिए अनुकूल मौसम होने के बावजूद मिट्टी और मोरम के चालान से जुड़ी तकनीकी अड़चन ने ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके कारण राज्यभर में करीब 2000 करोड़ रुपये की चालू सड़क योजनाओं का काम प्रभावित होने की बात सामने आई है।
खान विभाग की ओर से सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी और मोरम का वैध चालान अनिवार्य किए जाने के बाद भुगतान की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो गई है। ठेकेदारों का कहना है कि खनन पोर्टल पर मिट्टी और मोरम का चालान जेनरेट करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण वे जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन, निर्माण कार्यों के बिलों का भुगतान अटक गया है और कई जगह काम की रफ्तार थम गई है।
मिट्टी-मोरम के चालान ने कैसे बढ़ाई परेशानी?
सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी और मोरम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। खान विभाग के नियमों के अनुसार, इन सामग्रियों के वैध चालान का सत्यापन होने के बाद ही संबंधित ठेकेदारों के बिलों का भुगतान किया जा सकता है।
समस्या यह है कि ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के अनुसार, मौजूदा खनन पोर्टल या व्यवस्था में मिट्टी और मोरम के चालान जारी करने की स्पष्ट सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नियमों का पालन करने के लिए जरूरी कागजात जुटाना मुश्किल हो रहा है।
इस तकनीकी और प्रशासनिक अड़चन का सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ा है। ठेकेदारों के बिल लंबित होने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान नहीं मिलने के कारण कई ठेकेदारों ने निर्माण कार्य धीमा कर दिया है या फिलहाल काम रोक दिया है।
इंजीनियर भी भुगतान करने में असमर्थ
चालान से जुड़ी समस्या ने सड़क निर्माण विभागों के इंजीनियरों के सामने भी मुश्किल खड़ी कर दी है। निर्धारित नियमों और जरूरी दस्तावेजों के अभाव में वे ठेकेदारों के लंबित बिलों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
भुगतान में देरी का असर निर्माण स्थलों पर भी दिखाई देने लगा है। ठेकेदारों की ओर से मशीनें और मजदूर हटाए जाने के कारण कई जगह सड़क निर्माण प्रभावित हुआ है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की योजनाओं में देरी की आशंका बढ़ गई है।
बरसात के कारण पहले ही निर्माण कार्यों के लिए सीमित समय मिला था। अब मौसम अनुकूल होने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया में फंसे मामलों के कारण योजनाओं को गति नहीं मिल पा रही है।
सरकार कैबिनेट संशोधन के जरिए निकाल सकती है रास्ता
मिट्टी और मोरम के चालान से जुड़ी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार नियमों और भुगतान प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस संबंध में खान विभाग की मौजूदा व्यवस्था में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई मिट्टी या मोरम के मद में संबंधित विभाग ठेकेदार के बिल से निर्धारित राशि की दोगुनी रकम काटकर खान विभाग के खाते में जमा करा सकेगा। इससे चालान की मौजूदा प्रक्रिया के कारण भुगतान में आ रही बाधा को दूर करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी और संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी होगा। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान की प्रक्रिया किस तरह बहाल की जाएगी।
ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर टिकी नजरें
झारखंड में ग्रामीण सड़कें गांवों को प्रखंड मुख्यालय, बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सुविधाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में करीब 2000 करोड़ रुपये की योजनाओं का प्रभावित होना ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है।
अब ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों की नजर सरकार के प्रस्तावित फैसले पर है। यदि कैबिनेट से संशोधन को मंजूरी मिलती है और भुगतान संबंधी अड़चन दूर होती है, तो सड़क निर्माण कार्यों को दोबारा गति मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती चालान की तकनीकी समस्या का समाधान कर लंबित भुगतान की प्रक्रिया बहाल करना है, ताकि मौसम अनुकूल रहने के दौरान सड़क निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।