जमशेदपुर में फिर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का बम, आसपास 8 और बम होने का शक..सर्च ऑपरेशन तेज...

Jamshedpur: 17 मार्च को मिले 500 पाउंड के अमेरिकी बम के बाद सोमवार को सेना के ड्रोन सर्वे में एक और बम का पता चलने से हड़कंप मच गया है. ग्रामीणों का दावा है कि जमीन के नीचे 8 और घातक बम दबे हो सकते हैं. जिसके बाद सेना ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया है.
 

Jamshedpur: जमशेदपुर में एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है. ताजा मामले में एक और पुराना बम बरामद किया गया है, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि उसी क्षेत्र में ऐसे करीब 8 और बम दबे हो सकते हैं. बम मिलने की सूचना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया. एहतियातन आसपास के इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया है. सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र की गहन तलाशी में जुटी हुई हैं.

पहले भी मिल चुके हैं बम

यह पहली बार नहीं है जब जमशेदपुर में द्वितीय विश्व युद्ध के अवशेष मिले हों. इससे पहले भी अलग-अलग इलाकों में पुराने बम और विस्फोटक सामग्री मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.

प्रशासन अलर्ट मोड में

प्रशासन का कहना है कि:

  • बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जाएगा
  • पूरे इलाके की सघन जांच की जा रही है
  • स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है.

सेना के वरिष्ठ अधिकारी अब उच्च मुख्यालय के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं ताकि इन बमों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर 'डिफ्यूज' किया जा सके. विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जरा सीरगड़ या गलत दबाव से दशकों पुराना केमिकल रिएक्शन सक्रिय हो सकता है. वहीं, एक रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि बम मिलना इत्तेफाक हो सकता है, लेकिन दूसरे बम की पुष्टि और अन्य की आशंका यह बताती है कि यह पूरा बेल्ट 'अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस' (UXO) का हॉटस्पॉट हो सकता है.

सेना की टीम आई हुई है. बरामद बम को अपने कब्जे में ले लिया है. सेना की टीम मेटल डिटेक्टर से तलाशी अभियान चला रही है. इस काम में स्थानीय प्रशासन भी सहयोग कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि कल दोनों बम को डिफ्यूज किया जा सकता है:- अजीत कुजूर, घाटशिला एसडीपीओ

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस रेतीले तट के नीचे कम से कम 8 और बम छिपे हो सकते हैं, जो प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. यह क्षेत्र द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सामरिक रूप से सक्रिय रहा था, जिससे और बम मिलने की आशंका लग रही है. यदि यह सच साबित होता है, तो यह पूरा इलाका एक बड़े विस्फोटक भंडार के ऊपर बसा है, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे का सबब बन सकता है.

विस्फोटक की क्षमता

बरामद बम 'AN-M64 500 lb' मार्क का अमेरिकी हवाई बम है. जानकारों के अनुसार, दशकों बाद भी इसका बारूद सक्रिय और अत्यंत विनाशकारी है.

कैसे पहुंचे बम?

विशेषज्ञों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और परिवहन से जुड़े ठिकाने रहे हैं, जिसके कारण आज भी जमीन के नीचे ऐसे विस्फोटक अवशेष मिलने की संभावना बनी रहती है. जमशेदपुर में एक और बम की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है. अगर आशंका के अनुसार और बम मिलते हैं, तो बड़े स्तर पर सुरक्षा और निष्क्रियकरण अभियान चलाया जा सकता है.