स्टाइल और स्टंट के चक्कर में जान जोखिम में डाल रहे युवा, बिना हेलमेट तेज रफ्तार बनी सड़क हादसों की बड़ी वजह

Ranchi: राजधानी रांची में हर महीने औसतन 40 से 45 लोग अपनी जान सड़क हादसों में गवां देते हैं, मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की हैं. आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट पहन कर वाहन नहीं चलाने वाले युवा ज्यादातर मौत के आगोश में समा रहे हैं. पुलिस प्रशासन की तरफ से तमाम जागरुकता अभियान के बावजूद ऐसे हादसों में कमी नहीं आ रही है.
 

Ranchi: झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में युवा वर्ग के बीच बाइक स्टंट और तेज रफ्तार का बढ़ता क्रेज चिंता का विषय बनता जा रहा है. सड़कों पर बिना हेलमेट खतरनाक स्टंट करना, ओवरस्पीडिंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान को भी जोखिम में डाल रहा है.

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार और हेलमेट का उपयोग नहीं करना प्रमुख कारणों में शामिल है. कई युवा सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने और लोकप्रियता हासिल करने के लिए व्यस्त सड़कों पर खतरनाक करतब करते नजर आते हैं, जिससे गंभीर हादसों की आशंका बढ़ जाती है.

आजकल के समय में हम जिस चीज को युवा और बच्चे समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं वहीं लोग असल मायने में खुद का और दूसरों के मौत का कारन बनते जा रहे हैं लेकिन प्रशासन मौन है. क्यूंकि इस तरह की गतिविधियां एक और दो दिनों की नहीं बल्कि ये रोजाना की तरह हो गई है. 

क्योंकि रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट्स और सड़क सुरक्षा कार्यालय के आंकड़े इसी तरफ इशारा करते हैं कि ज्यादातर रोड एक्सीडेंट्स में मरने वालों में ज्यादातर लोग 18 से 30 साल के बीच के हैं.

पिछले डेढ़ साल के आंकड़े यह बता रहे हैं कि सड़क हादसों में जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनमें सबसे ज्यादा युवा थे. सड़क हादसों में मौत की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार और बिना हेलमेट की सवारी निकल कर सामने आयी है. रांची पुलिस सड़क सुरक्षा को लेकर अथक मेहनत कर रही है. ट्रैफिक एसपी खुद घंटे सड़कों पर उतरकर युवाओं को समझा रहे हैं उनके चालान भी काट रहे हैं लेकिन नतीजा अब तक तो शून्य ही है.

सड़क हादसे में मरने वाले 18 से 30 वर्ष वाले ज्यादा

राजधानी रांची में हर महीने औसतन 40 से 45 लोग अपनी जान सड़क हादसों में गवां देते हैं, मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की हैं. आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट पहन कर वाहन नहीं चलाने वाले युवा ज्यादातर मौत के आगोश में समा रहे हैं. पुलिस प्रशासन की तरफ से तमाम जागरुकता अभियान के बावजूद ऐसे हादसों में कमी नहीं आ रही है.

तेज रफ्तार में वाहन चलाने वाले युवा हेलमेट से गुरेज करते हैं नतीजा जब भी वह हादसे के शिकार होते हैं उनके सिर में गंभीर चोट लगती है और अंजाम मौत होता है. सड़क सुरक्षा कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में केवल राजधानी रांची में 527 लोग सड़क हादसों की वजह से बेमौत मारे गए. मृतकों में सबसे ज्यादा युवा थे, जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच थी.

रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट्स और सड़क सुरक्षा कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 के जनवरी महीने से लेकर दिसंबर महीने तक राजधानी रांची में 1096 सड़क हादसे सामने आए जिनमें 527 की मौत हो गई जबकि 413 लोग सड़क हादसों में घायल हुए. जो घायल हुए उनमें से कई जीवन भर के लिए अपाहिज भी हो गए. आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा हादसे रांची के रूरल एरिया में स्थित रिंग रोड पर सामने आए. साल 2026 में भी मई महीने तक लगभग 150 की संख्या में सड़क हादसों में मौते हुई है. इनमें भी युवा ज्यादा हैं.

आकड़ों के अनुसार सड़क हादसों में मरने वाले सबसे ज्यादा युवा हैं, इनकी उम्र 18 से 30 के बीच है. बिना हेलमेट सवारी, तेज रफ्तार, शराब और ईयर बर्ड-हेडफोन का इस्तेमाल हादसों की प्रमुख वजहों के रुप में सामने आई है. साल 2025 के आंकड़ों की बात करें तो राजधानी रांची में 1096 सड़क हादसे सामने आए. जिसमें 527 लोगों की मौत हुई. इनमें 18 से लेकर 30 साल के आयु वालों की संख्या 149 थी, जिनमें मृतकों में लड़के 116 थे और लड़की की संख्या 33 थी.

हेलमेट नहीं पहनना चाहते युवा, मौत की वजह बन रही

रांची ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह के अनुसार युवा पीढ़ी किसी भी कीमत पर हेलमेट नहीं पहनना चाहता है. हम स्कूल-कॉलेज से लेकर तमाम जगहों पर जागरुकता अभियान भी चला रहे हैं, हेलमेट भी बांट रहे हैं. यहां तक की हेलमेट पहनवाने के लिए जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस के साथ चेकिंग अभियान भी चलाते हैं, बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले लोगों के चालान भी काटते हैं. लेकिन कई युवा है जो हेलमेट नही पहनना चाहते और हादसों का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में लोगों को यह समझना होगा कि पुलिस प्रशासन को धोखा नहीं दे रहे हैं बल्कि खुद के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

रांची ट्रैफिक एसपी के अनुसार हादसों को देखकर किसी का भी रूह कांप जाए. हेलमेट नहीं पहनने की वजह से लगातार युवा मौत के गाल में समा रहे हैं और घायल भी हो रहे हैं. ऐसे हादसों को रोकने के लिए हम तमाम प्रयास कर रहे हैं. ट्रैफिक पुलिस के द्वारा सुबह से लेकर शाम तक चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोगों को सड़क सुरक्षा को लेकर जागरुकता पैदा हो.

रांची ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि राजधानी रांची में ऑनलाइन चालान कटता है. सड़क पर ट्रैफिक पुलिस को उतारने की जरूरत भी नहीं है. लेकिन लगातार हो रहे हादसों की वजह से ट्रैफिक पुलिस को सड़क पर उतरकर युवाओं को समझाना भी पड़ रहा है और उनका चालान भी काटना पड़ रहा है. ऐसे मामलों में परिवार के लोगो को भी आगे आना होगा. जब तक गार्जियन का सहयोग नहीं मिलेगा ऐसे हादसों पर ब्रेक लगाना काफी मुश्किल भरा काम है. घर से निकलने के दौरान ही बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि उन्हें ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए सड़क पर चलना है.

एनएच और रिंग रोड सबसे ज्यादा हादसे

पूर्व के वर्षों में रांची के शहरी इलाकों में भी सड़क हादसे ज्यादा हुआ करते थे लेकिन उनमें काफी कमी आई है. लेकिन सबसे दुखद बात यह है कि अब सड़क हादसे बेहतर सड़कों पर हो रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक सड़क हादसे बेहतरीन सड़कों पर हुए हैं. जिनमें रांची के रिंग रोड, रांची टाटा रोड शामिल हैं.

हाल के दिनों में इन सड़कों को बेहतर किया गया है. जिसके बाद यहां चलने वाले वाहनों की रफ्तार काफी तेज हो गई है. खासकर युवा हाई स्पीड बाइक चलाते हैं. ऐसी बाइक 200 सीसी इंजन से शुरू होती है. हाई स्पीड इंजन वाली बाइक को चलाना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल इसे आपात स्थिति में संभालना होता है. बाइक में लगे ट्विन डिस्क ब्रेक के कारण अक्सर युवा दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. आज के युवा भी किसी भी कीमत पर हेलमेट नहीं पहना चाहते हैं. जितने भी सड़क हादसों में युवाओं की जान गई है, उनमें से अधिकांश ने हेलमेट नहीं पहना था.