दिल्ली से हरियाणा तक दौड़ेंगी 50 नई इलेक्ट्रिक बसें, CM रेखा गुप्ता ने तेहखंड डिपो से दिखाई हरी झंडी; प्रदूषण घटाने पर सरकार का फोकस
New Delhi: दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने और प्रदूषण कम करने की दिशा में सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तेहखंड बस डिपो से 50 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये बसें दिल्ली और हरियाणा के बीच इंटरस्टेट रूट पर यात्रियों को परिवहन सुविधा देंगी।
नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से दिल्ली-हरियाणा के बीच रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सरकार का कहना है कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित बसों के बढ़ते इस्तेमाल से प्रदूषण और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।
परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर
बसों को रवाना करने के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से दिल्ली को स्वच्छ बनाने के प्रयासों को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ नई बसें सड़कों पर उतारना नहीं है, बल्कि दिल्ली के परिवहन तंत्र को धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा आधारित व्यवस्था में बदलना भी है। इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार इसी लक्ष्य का हिस्सा है।
दिल्ली का बस बेड़ा 5 हजार के पार
सरकार के मुताबिक दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन के लिए बसों का कुल बेड़ा अब 5 हजार से अधिक हो गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई जा रही है।
सरकार का फोकस आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा वाले सार्वजनिक परिवहन को विस्तार देने पर है। इसके जरिए निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली-हरियाणा के यात्रियों को मिलेगा फायदा
तेहखंड डिपो से शुरू हुई इन 50 बसों की खासियत यह है कि इनका संचालन दिल्ली की सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। ये बसें दिल्ली और हरियाणा के बीच इंटरस्टेट कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी।
दिल्ली और हरियाणा के बीच बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों के लिए रोजाना सफर करते हैं। ऐसे में नई इलेक्ट्रिक बस सेवा से इन यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है।
प्रदूषण के खिलाफ इलेक्ट्रिक बसों पर भरोसा
दिल्ली में प्रदूषण लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। खासकर सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता खराब होने के कारण प्रदूषण का मुद्दा और गंभीर हो जाता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सरकार की स्वच्छ परिवहन नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक बसों में डीजल इंजन नहीं होता और इनके संचालन के दौरान टेलपाइप से डीजल बसों जैसा प्रत्यक्ष उत्सर्जन नहीं होता। हालांकि, इनके पर्यावरणीय लाभ बिजली के उत्पादन के तरीके और पूरी परिवहन व्यवस्था पर भी निर्भर करते हैं।
ओखला लैंडफिल को लेकर भी CM का बड़ा दावा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ओखला लैंडफिल साइट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार लैंडफिल की समस्या के समाधान के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले वर्षों में इसे खाली कराने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर इस समस्या को लेकर पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार लैंडफिल से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
ओखला लैंडफिल लंबे समय से कचरे के ढेर, दुर्गंध और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में इसे खाली कराने की दिशा में होने वाली प्रगति आसपास के इलाकों और दिल्ली के पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
साफ परिवहन की ओर बढ़ता कदम
तेहखंड डिपो से 50 नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत को दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार की योजना इलेक्ट्रिक बसों के नेटवर्क को आगे और विस्तार देने की है, ताकि सार्वजनिक परिवहन मजबूत हो और निजी वाहनों पर निर्भरता घटे।
दिल्ली सरकार का दावा है कि आने वाले समय में परिवहन के साथ-साथ कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मोर्चों पर भी काम तेज किया जाएगा। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार राजधानी को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने की कोशिश का हिस्सा है।