20 सांसदों के बाद अब बागी विधायकों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! ममता का बड़ा एक्शन प्लान?
Kolkata: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद सामने आए कथित असंतोष के बीच अब 20 बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के बाद बागी विधायकों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला टीएमसी गुट बागी नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। बागी सांसदों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला पहुंचने के बाद अब पार्टी के भीतर विधायकों की भूमिका और उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखे जाने की बात सामने आई है।
लोकसभा सचिवालय ने 20 बागी सांसदों को भेजा नोटिस
इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया, जब लोकसभा सचिवालय ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
जानकारी के मुताबिक, ये नोटिस अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिका पर संज्ञान लेने के बाद जारी किए गए हैं। सांसदों से दलबदल विरोधी कानून की 10वीं अनुसूची के तहत एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब और स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
बताया गया है कि नोटिस 25 अगस्त को जारी किए गए और सांसदों से संसदीय दलबदल (अयोग्यता) नियम, 1985 के नियम 7(3) के तहत अपना पक्ष रखने को कहा गया है।
सांसदों के बाद अब बागी विधायकों पर नजर
ममता बनर्जी खेमे के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि संसद में बागी सांसदों के खिलाफ प्रक्रिया पूरी होने के बाद पश्चिम बंगाल के बागी टीएमसी विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई का अगला चरण शुरू किया जा सकता है।
ममता खेमे से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कई बागी विधायक अभी भी पार्टी के संपर्क में हैं और उनके जल्द टीएमसी में वापस लौटने की संभावना है। वहीं, जो विधायक पार्टी में वापस नहीं लौटेंगे, उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
इससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर टीएमसी के भीतर बड़े टकराव की स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं।
सागरिका घोष ने भी की कार्रवाई की मांग
टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी बागी सांसदों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि स्पीकर कार्यालय द्वारा करीब दो महीने बाद इस मामले में कार्रवाई शुरू होना एक बड़ा मोड़ है। उन्होंने बागी सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित किए जाने की मांग की है।
संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत स्पीकर कार्यालय द्वारा 2 महीने बाद यह कार्रवाई एक बड़ा मोड़ है. 20 विश्वासघातियों को तुरंत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए. -सागरिका घोष, राज्यसभा सांसद, तृणमूल कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध सुनवाई के दिए निर्देश
बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट भी पहले ही समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से विचार करने का निर्देश दिया है।
अब लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी होने के बाद बागी सांसदों को तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब देना होगा।
बागी सांसदों का दावा- हमारा पक्ष मजबूत
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए बागी सांसदों ने अपना पक्ष मजबूत होने का दावा किया है।
बागी गुट की प्रमुख सांसद और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने कहा कि कानून की व्याख्या कई तरीकों से की जा सकती है। उनका दावा है कि उनके पास अलग होने के लिए जरूरी दो-तिहाई से अधिक बहुमत है।
शताब्दी रॉय के मुताबिक, बागी सांसद निर्धारित समय सीमा के भीतर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे।
अब विधायकों पर कार्रवाई से बढ़ सकती है सियासी हलचल
फिलहाल टीएमसी के भीतर सांसदों की अयोग्यता का मामला कानूनी प्रक्रिया में है। इसी बीच विधायकों पर संभावित कार्रवाई की खबर ने राज्य की सियासत को और गर्म कर दिया है।
अगर बागी विधायक पार्टी में वापस लौटते हैं तो टीएमसी के भीतर टूट को रोकने की कोशिश सफल मानी जाएगी।
वहीं, यदि वे अलग गुट के साथ बने रहते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के अंदरूनी संकट पर सभी की नजरें रहेंगी।