दीदी के बाद अब भाईपो निशाने पर, सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR
Wet Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्रबिंदु और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनके आवास ‘शांतिनिकेतन’ की सुरक्षा में कटौती और केएमसी के नोटिसों के बीच अब उनके खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में एक शिकायत दर्ज हुई है.
डायमंड हार्बर के सांसद पर पहले से दर्ज है एक प्राथमिकी
आरोप है कि डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी ‘गैर-जिम्मेदाराना’ पोस्ट की, जिससे राज्य का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है. यह शिकायत ऐसे समय में हुई है, जब वे पहले से ही बिधाननगर में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) का सामना कर रहे हैं. गुरुवार को पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि अर्नब कांति दास नामक व्यक्ति ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लिखित शिकायत की है. शिकायतकर्ता ने 2 मई 2026 को की गयी एक सोशल मीडिया पोस्ट की प्रति पुलिस को सौंपी है. उनका दावा है कि इस पोस्ट की भाषा और इरादा दोनों ही समाज में विभाजन पैदा करने वाले हैं.
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिली है. आरोपों की सत्यता जांचने के लिए प्राथमिक तफ्तीश शुरू कर दी गयी है. जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी धाराएं तय की जायेंगी.
अभिषेक बनर्जी के लिए यह दोहरी मार है, क्योंकि उन पर पहले से ही एक गंभीर FIR दर्ज है. बागुईआटी निवासी राजीब सरकार ने बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में अभिषेक के खिलाफ केस दर्ज कराया था. आरोप है कि 27 अप्रैल को एक जनसभा में टीएमसी नेता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों और नेताओं को खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था- देखेंगे कि 4 मई की आधी रात के बाद उन्हें बचाने कौन आता है. पुलिस इस बयान को भड़काऊ भाषण और हिंसा के लिए उकसाने के एंगल से देख रही है.
कोलकाता पुलिस के मुख्यालय लालबाजार से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस इन दोनों शिकायतों को जोड़कर देख रही है. साइबर सेल विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित पोस्ट किस डिवाइस से की गयी और इसका व्यापक असर क्या हुआ. भाजपा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि टीएमसी नेता हार की बौखलाहट में भाषा की मर्यादा लांघ रहे हैं. टीएमसी का कहना है कि यह पूरी तरह से पॉलिटिकल वेंडेटा यानी राजनीतिक प्रतिशोध है.
अगला कदम क्या होगा?
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो पुलिस अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से ‘खाकी’ का रुख बदला है, उसने टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है. अब सबकी नजरें पुलिस की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इस शिकायत को भी FIR में बदला जायेगा.