Train Food पर AI की नजर! पैंट्री में लगेगा AI CCTV, गंदगी और लापरवाही पर तुरंत मिलेगा Alert
Indian Railway: रेल यात्रियों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। ट्रेनों की पैंट्री कार और बेस किचन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस CCTV कैमरे लगाने की योजना है। इस व्यवस्था के जरिए खाना तैयार करने से लेकर उसकी पैकेजिंग और यात्रियों तक सप्लाई की प्रक्रिया की निगरानी की जा सकेगी।
रेलवे कैटरिंग से जुड़ी सेवाओं में IRCTC की अहम भूमिका है। IRCTC अपने लाइसेंस प्राप्त वेंडर्स के माध्यम से ट्रेनों में यात्रियों को भोजन, चाय और अन्य खानपान सेवाएं उपलब्ध कराता है। नए AI आधारित निगरानी सिस्टम के लागू होने के बाद कैटरिंग प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित कंट्रोल रूम को रियल टाइम अलर्ट मिल सकेगा।
AI कैमरे कैसे करेंगे निगरानी?
प्रस्तावित AI CCTV सिस्टम सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा। कैमरों के जरिए किचन में काम करने वाले कर्मचारियों की हाइजीन और साफ-सफाई से जुड़ी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।
सिस्टम यह पता लगाने में मदद करेगा कि कर्मचारी काम के दौरान जरूरी सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। उदाहरण के तौर पर:
- कर्मचारियों ने हैंड ग्लव्स पहने हैं या नहीं।
- हेयरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं।
- किचन और कार्यस्थल की साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं।
- खाने की तैयारी और पैकेजिंग की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
- किचन में चूहे, कॉकरोच, मक्खी या अन्य कीटों की मौजूदगी तो नहीं है।
किसी संभावित गड़बड़ी की पहचान होने पर सिस्टम संबंधित प्रबंधन को अलर्ट भेज सकेगा। इससे शिकायत सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय निगरानी के स्तर पर ही समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
पहले प्रीमियम ट्रेनों में लागू होगी व्यवस्था
AI आधारित CCTV निगरानी व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की योजना है। शुरुआती चरण में वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों की पैंट्री कार और संबंधित बेस किचन को इसके दायरे में लाया जा सकता है।
इसके बाद सिस्टम का विस्तार अन्य ट्रेनों में भी किए जाने की योजना है। इससे रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था में काम करने वाले वेंडर्स की निगरानी और जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सालभर में करोड़ों मील सर्व करता है IRCTC
रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था का पैमाना काफी बड़ा है। PIB की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रेलवे यात्रियों को सालाना औसतन 58 करोड़ मील उपलब्ध कराता है। यानी प्रतिदिन करीब 15 से 16 लाख मील की आपूर्ति होती है।
इसके लिए 700 से अधिक ट्रेनों में पैंट्री कार और 600 से अधिक बेस किचन की सुविधा बताई गई है। बेस किचन में तैयार पैक्ड फूड को संबंधित स्टेशनों से ट्रेनों में लोड किया जाता है और जरूरत के अनुसार यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है।
भारतीय रेलवे के विशाल यात्री नेटवर्क को देखते हुए कैटरिंग व्यवस्था में निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण एक बड़ी चुनौती है। AI आधारित CCTV इसी निगरानी व्यवस्था को तकनीक के जरिए मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
यात्रियों के लिए RailMadad पर शिकायत की सुविधा
अगर यात्रा के दौरान यात्रियों को खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई या कोच और वॉशरूम से जुड़ी कोई समस्या होती है, तो वे रेलवे के RailMadad प्लेटफॉर्म के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
RailMadad के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाता है, ताकि समस्या पर कार्रवाई की जा सके। यात्रियों के लिए इसका ऐप और अन्य डिजिटल माध्यम भी उपलब्ध हैं।
यात्री कोच और रेल इंजनों में भी CCTV पर जोर
भारतीय रेलवे पहले से ही यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के लिए ट्रेन के कोच और रेल इंजनों में CCTV लगाने की दिशा में काम कर रहा है।
PIB की जुलाई 2025 की जानकारी के अनुसार, करीब 74,000 यात्री कोच और 15,000 रेल इंजनों में CCTV लगाने की योजना बताई गई थी। यात्री कोच में कम रोशनी और ट्रेन की तेज रफ्तार के दौरान भी काम करने में सक्षम कैमरों का इस्तेमाल किया जाना है।
अब पैंट्री कार और बेस किचन में AI आधारित निगरानी को जोड़ने से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ कैटरिंग की गुणवत्ता और हाइजीन पर भी तकनीक की निगरानी बढ़ सकती है।
क्या बदलेगा यात्रियों के लिए?
AI CCTV व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को मिलने वाले खाने की तैयारी और सप्लाई प्रक्रिया की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। किसी लापरवाही या स्वच्छता संबंधी समस्या की पहचान होने पर संबंधित प्रबंधन को तत्काल जानकारी मिलने की संभावना है।
हालांकि, अंतिम रूप से इस व्यवस्था का असर इसके वास्तविक क्रियान्वयन, AI सिस्टम की क्षमता और रेलवे-IRCTC की निगरानी एवं कार्रवाई की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।