कानपुर में बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप गलत, जांच में नहीं मिला कोई सबूत
UP News: कानपुर में बाढ़ राहत शिविर के दौरान कथित तौर पर एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से की गई जांच में 02 सितंबर को बाढ़ राहत कैंप में Trimethoprim and Sulphamethoxazole IP सीरप वितरित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग ने इस संबंध में लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन बताया है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, उपलब्ध रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच में भी ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिससे यह साबित हो कि संबंधित बैच की दवा बाढ़ पीड़ितों के बीच बांटी गई थी।
2025 में ड्रग वेयरहाउस पहुंचा था सीरप
जांच में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, Trimethoprim and Sulphamethoxazole IP सीरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस, कानपुर नगर में प्राप्त हुआ था। इसके बाद इसे जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को भेजा गया था।
विभाग का कहना है कि मार्च 2025 तक संबंधित सीरप सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित किया जा चुका था। यानी बाढ़ राहत शिविर में दवा बांटे जाने की अवधि से काफी पहले ही इस स्टॉक का वितरण स्वास्थ्य केंद्रों को किया जा चुका था।
किसी CHC या PHC में नहीं मिला संबंधित बैच
मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच में वर्तमान स्टॉक की भी पड़ताल की गई। विभाग के अनुसार, जिले के किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ राहत शिविर में इसी बैच की दवा के वितरण से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाया है।
बाढ़ राहत के स्टॉक रजिस्टर में भी नहीं मिली एंट्री
जांच के दौरान बाढ़ राहत कार्यों के लिए तैयार किए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा गया। इसमें Trimethoprim and Sulphamethoxazole IP सीरप के वितरण की एक भी प्रविष्टि नहीं मिली।
विभाग के मुताबिक, यदि बाढ़ राहत शिविर में इस दवा का वितरण किया गया होता तो उसका रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए था। लेकिन जांच में ऐसी कोई एंट्री सामने नहीं आई।
CMO ने खबर का किया खंडन
पूरे मामले की जांच के बाद कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने संबंधी खबर का खंडन किया है। स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड और बाढ़ राहत के रजिस्टर के आधार पर आरोपों को तथ्यहीन बताया है।
विभाग का कहना है कि जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह पुष्टि हो सके कि 02 सितंबर को बाढ़ राहत कैंप में संबंधित सीरप बाढ़ पीड़ितों को वितरित किया गया था।