बंगाल में बाल विवाह पर लगेगी रोक! शुभेंदु अधिकारी ने जारी किया बड़ा निर्देश

Subhendu Adhikari on Child Marraige: पश्चिम बंगाल में बाल विवाह रोकने को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि शादी के लिए उम्र का प्रमाण पत्र अनिवार्य किया जाएगा और बिना उम्र प्रमाण पत्र के विवाह की अनुमति नहीं होगी. बाल विवाह की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस कदम का उद्देश्य नाबालिगों के विवाह पर रोक लगाना और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है.
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल में बाल विवाह पर रोक लगाने को लेकर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बाल विवाह को हर हाल में रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि जिस बंगाल ने कभी देश को दिशा दिखाई, वहां नाबालिग बेटियों की शादी का बढ़ता चलन गंभीर चिंता का विषय है।

शुभेंदु अधिकारी ने बाल विवाह कराने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि कम उम्र में शादी करने वालों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

बाल विवाह कराने वालों पर होगी कार्रवाई

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि देश में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। इसके तहत पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है।

इसके बावजूद कम उम्र में विवाह कराए जाने की घटनाओं को लेकर उन्होंने चिंता जताई। उनका आरोप है कि आर्थिक लाभ के लालच में कुछ जगहों पर मंदिरों और काजियों के माध्यम से नाबालिगों की शादी कराई जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बाल विवाह कराने में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मंदिरों में भी शुरू हुआ जागरूकता अभियान

बाल विवाह रोकने को लेकर स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता की पहल शुरू होने की बात सामने आई है। हुगली जिले के चुंचुड़ा स्थित सरत्सरणी के एक काली मंदिर में इस संबंध में बैनर लगाया गया है।

बैनर के जरिए लोगों को संदेश दिया गया है कि उम्र के प्रमाण पत्र के बिना विवाह नहीं कराया जाएगा।

शादी से पहले उम्र की होगी जांच

मंदिर में विवाह कराने वाले पुरोहित के मुताबिक, यदि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम है तो किसी भी परिस्थिति में विवाह नहीं कराया जाएगा। विवाह से पहले उम्र का प्रमाण देखना अनिवार्य बताया गया है।

इसके लिए आधार कार्ड या अन्य वैध उम्र प्रमाण पत्र की जांच की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य नाबालिगों की शादी को रोकना और विवाह कराने वालों को कानून के प्रति जागरूक करना है।

बाल विवाह रोकने पर बढ़ा जोर

बाल विवाह को रोकना केवल कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में उम्र की पुष्टि के बाद ही विवाह कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

शुभेंदु अधिकारी के बयान और मंदिर में लगाए गए जागरूकता बैनर के बाद पश्चिम बंगाल में बाल विवाह के खिलाफ सख्ती और जागरूकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।