बंगाल चुनाव: करोड़ों की संपत्ति वाले उम्मीदवारों के बीच आम जिंदगी का संघर्ष, कोई करोड़ों का मालिक तो कहीं संघर्ष करते बेहद साधारण पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी
रिपोर्ट यह भी बताती है कि उम्मीदवारों के बीच शिक्षा और उम्र को लेकर भी बड़ी विविधता है. हालांकि, इस बार मुख्य फोकस धनबल और बाहुबल पर है. चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि मतदाता एक जागरूक फैसला ले सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी राजनीति में धनबल की बढ़ती भूमिका चिंता का विषय है.
ADR Report Of Rich and Poor Candidates: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि आर्थिक असमानता की एक बड़ी तस्वीर भी सामने ला रहा है. उम्मीदवारों के शपथपत्र (affidavit) के विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं. जहां एक ओर कई प्रत्याशी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है.
आंकड़ों के मुताबिक, लगभग पांच में से एक उम्मीदवार करोड़पति (crorepati) है, जबकि कुछ उम्मीदवारों के पास मात्र कुछ सौ रुपये तक की संपत्ति दर्ज है. यह डेटा Association for Democratic Reforms और चुनाव निगरानी समूहों द्वारा किए गए विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें सैकड़ों उम्मीदवारों के शपथपत्रों का अध्ययन किया गया है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक तरफ करोड़ों की संपत्ति वाले ‘कुबेर’ चुनाव मैदान में हैं, तो कुछ ऐसे भी प्रत्याशी हैं, जिनकी कुल संपत्ति एक सामान्य दिहाड़ी मजदूर की एक दिन की कमाई से भी कम है.
पहले चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से लगभग पांचवां हिस्सा करोड़पतियों का है.
- टॉप-3 रईस : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जंगीपुर से उम्मीदवार जाकिर हुसैन 133 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ सबसे अमीर प्रत्याशी हैं. उनके बाद बरजोड़ा से गौतम मिश्रा (105 करोड़ रुपए) और दुर्गापुर पश्चिम से कवि दत्त (72 करोड़ रुपए) का नंबर आता है.
- पार्टीवार स्थिति : करोड़पतियों की संख्या में TMC सबसे आगे है, जिसके 106 उम्मीदवार करोड़पति हैं. भाजपा के 71, कांग्रेस के 50 और माकपा (CPM) के 24 उम्मीदवारों के पास करोड़ों की संपत्ति है.
आश्चर्यजनक गरीबी : महज 500 रुपये की संपत्ति
अमीरों के इस रेले के बीच कुछ ऐसे भी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जो अपनी सादगी या आर्थिक तंगी के कारण चर्चा में हैं.
- रुबिया बेगम (AJUP): दुर्गापुर पूर्व से चुनाव लड़ रही रुबिया बेगम ने अपनी कुल संपत्ति केवल 500 रुपए घोषित की है.
- सुश्रिता सोरेन (SUCI): मेदिनीपुर से मैदान में उतरीं सुश्रिता के पास कुल 700 रुपए की संपत्ति है.
- यशोदा बर्मन : जलपाईगुड़ी की इस उम्मीदवार ने हलफनामे में 924 रुपए की संपत्ति घोषित की है.
ADR Report: BJP और TMC में क्रिमिनल रिकॉर्ड की होड़
संपत्ति के साथ-साथ उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास ने भी चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 23 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
- भाजपा (BJP): आपराधिक मामलों में भाजपा सबसे आगे है. पार्टी के 152 उम्मीदवारों में से 106 पर क्रिमिनल केस लंबित हैं. इनमें से 96 मामले बेहद गंभीर श्रेणी के हैं.
- तृणमूल (TMC): टीएमसी के 148 उम्मीदवारों में से 63 पर आपराधिक केस हैं. 48 पर गंभीर प्रकृति के मुकदमे दर्ज हैं.
- कुल औसत : हर 5 में से एक उम्मीदवार (20 प्रतिशत) गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहा है.
शिक्षा
रिपोर्ट यह भी बताती है कि उम्मीदवारों के बीच शिक्षा और उम्र को लेकर भी बड़ी विविधता है. हालांकि, इस बार मुख्य फोकस धनबल और बाहुबल पर है. चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि मतदाता एक जागरूक फैसला ले सकें.
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी राजनीति में धनबल की बढ़ती भूमिका चिंता का विषय है. चुनाव प्रचार, रैलियां, सोशल मीडिया कैंपेन और संगठनात्मक खर्च ने चुनाव लड़ने की लागत कई गुना बढ़ा दी है.
इस वजह से आम नागरिक या सीमित संसाधनों वाले उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ना लगातार कठिन होता जा रहा है.
जनता के लिए बड़ा सवाल
इस चुनावी तस्वीर ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या लोकतंत्र में धनबल का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, और क्या आम नागरिकों की आवाज इन बड़े आर्थिक अंतर के बीच कमजोर पड़ रही है?
बंगाल चुनाव 2026 केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक असमानता बनाम राजनीतिक प्रतिनिधित्व की भी कहानी बन गया है. एक तरफ करोड़ों की संपत्ति वाले उम्मीदवार हैं, तो दूसरी तरफ बेहद सीमित संसाधनों वाले प्रत्याशी और इनके बीच मतदाता तय करेगा कि लोकतंत्र की दिशा क्या होगी.