बंगाल के सरकारी स्कूलों से नेताओं की छुट्टी, परिचालन समिति में अब जनप्रतिनिधियों की जगह अभिभावकों को मिलेगी जिम्मेदारी 

West Bengal: सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विकास भवन में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संरचना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और केंद्र सरकार के आठ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
 

West Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों की परिचालन (मैनेजिंग) समितियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. नए नियमों के तहत अब स्कूलों की परिचालन समितियों में राजनीतिक प्रतिनिधियों या जनप्रतिनिधियों की जगह अभिभावकों को प्राथमिकता दी जाएगी.

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य स्कूल प्रबंधन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था को राजनीति से दूर रखना है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूलों के संचालन और विभिन्न प्रशासनिक फैसलों में अभिभावकों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी. सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विकास भवन में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संरचना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और केंद्र सरकार के आठ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है. इसलिए केंद्र और राज्य सरकार की इसमें समान जिम्मेदारी है. पिछली सरकार की गलत नीतियों के कारण केंद्र का जो पैसा रुका हुआ था, वह जल्द ही राज्य के खजाने में आ जायेगा. इस वित्तीय वर्ष की केंद्रीय ग्रांट की राशि अगले सप्ताह मिलने की उम्मीद है.

एक अगस्त से राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में नये अध्याय की शुरुआत होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रांट की राशि से राज्य के 81 हजार स्कूलों का कायाकल्प किया जायेगा. सभी स्कूलों में स्वच्छ शौचालय और आर्सेनिक मुक्त पेयजल की व्यवस्था की जायेगी. छात्राओं की सुविधा के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें भी लगायी जायेंगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अगस्त से राज्य के छात्रों को मिलने वाले मिड डे मील की पोषण गुणवत्ता में भी सुधार किया जायेगा. इसके साथ ही सरकार निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की बेलगाम फीस वृद्धि पर भी कड़ी नजर रखेगी. जिन संस्थानों को एनओसी दी गयी है, उनकी सख्ती से जांच होगी. यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी मंजूरी के नवीनीकरण पर पुनर्विचार किया जायेगा.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर उत्पाद नहीं बनने दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्कूलों की परिचालन कमेटियों में किसी भी नेता को शामिल नहीं किया जायेगा. इन कमेटियों में छात्रों के अभिभावकों को स्थान दिया जायेगा, जबकि स्कूल के प्रशासक को ही परिचालन कमेटी का मुख्य अधिकारी बनाया जायेगा.

उन्होंने ओबीसी मामले के कारण नियुक्तियों में हो रही देरी पर कहा कि जल्द ही विधानसभा में कानून लाकर स्थिति को दुरुस्त किया जायेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार जल्द ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया से आगे निकल जायेगी. उन्होंने बताया कि नियुक्ति बोर्ड का चेयरमैन दुष्मंत नरियाल को बनाया गया है और उन्होंने सोमवार से पदभार संभाल लिया है. नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और पारदर्शी होगी.