अभिषेक बनर्जी को बड़ा झटका! सेवाश्रय पर हाईकोर्ट का बुलडोजर वाला आदेश
Kolkata: तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के सेवाश्रय शिविर को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने फालता में खेल के मैदान और बगीचे की जमीन पर बने बताए जा रहे अस्थायी निर्माणों को हटाने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “अस्थायी निर्माणों को हटाइए। क्या हम पुलिस को बुलाएं?”
यह मामला सेवाश्रय और मेडिकल कॉलेज के नाम पर किए गए कथित अस्थायी निर्माणों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि खेल के मैदान पर अतिक्रमण कर इन निर्माणों को खड़ा किया गया, जिससे स्थानीय लोगों और खेल गतिविधियों पर असर पड़ा।
सेवाश्रय की दो इमारतों को हटाने की मांग
फालता में तृणमूल सांसदों के कल्याण केंद्र की दो इमारतों को हटाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील अमीनउद्दीन खान के मुताबिक, फालता बीडीओ कार्यालय के पास स्थित खेल के मैदान और बगीचे की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर कल्याण केंद्र का निर्माण किया गया।
वकील का दावा है कि फिलहाल केंद्र का काम बंद है, लेकिन निर्माण अभी भी मौके पर मौजूद हैं। याचिका में इन निर्माणों को तत्काल हटाने की मांग की गई थी।
खेल के मैदान पर कब्जे का क्या है आरोप?
फालता निवासी और वकील अमीनउद्दीन खान ने कथित अतिक्रमण के खिलाफ अदालत का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि सेवाश्रय केंद्र के निर्माण के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इस मैदान में पहले स्कूलों की खेल गतिविधियां, क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताएं तथा विभिन्न सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। उनका दावा है कि निर्माण के बाद इन गतिविधियों पर असर पड़ा है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सेवाश्रय शिविर और मेडिकल कॉलेज के नाम पर किए गए अस्थायी निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने निर्माण हटाने को लेकर सख्त रुख दिखाया। अदालत ने सवाल किया कि “क्या हम पुलिस को बुलाएं?”
कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब संबंधित निर्माणों को हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
करीब 5 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा
सेवाश्रय परियोजना के तहत अभिषेक बनर्जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल सहायता केंद्र शुरू किया था।
दावे के अनुसार, विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में कई अस्थायी केंद्र भी बनाए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि इनमें सबसे बड़ा चिकित्सा सहायता केंद्र अभिषेक बनर्जी के लोकसभा क्षेत्र में बनाया गया था और इस पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
हालांकि, जमीन और निर्माण को लेकर लगाए गए आरोपों तथा खर्च से संबंधित दावों पर अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और संबंधित पक्षों के आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फालता स्थित सेवाश्रय से जुड़े अस्थायी निर्माणों को हटाने की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब सेवाश्रय परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस भी जारी है।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन अदालत के आदेश पर कब और किस तरह कार्रवाई करता है और निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है।