UP में युवा उद्यमियों के लिए बड़ा बदलाव: अब ट्रेनिंग के बाद ही मिलेगा 5 लाख का ब्याजमुक्त लोन, फर्जीवाड़े पर सरकार का डिजिटल शिकंजा

 
UP News: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब युवाओं को बिना प्रशिक्षण लिए लोन नहीं मिलेगा। राज्य सरकार ने योजना में बड़ा बदलाव करते हुए ऑनलाइन ट्रेनिंग को अनिवार्य कर दिया है। अब किसी भी अभ्यर्थी को बैंक से लोन राशि तभी जारी होगी, जब वह 30 घंटे का प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल करेगा।

सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को कारोबार के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना और आवेदन प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है। इसके लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम भी लागू किया गया है, ताकि प्रशिक्षण में किसी तरह की फर्जी उपस्थिति न हो सके।

30 घंटे की ट्रेनिंग के बाद मिलेगा लोन

नई व्यवस्था के अनुसार, बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों को पांच दिनों के भीतर 30 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण लेना होगा। यह प्रशिक्षण समाधान समिति, यूपीआईकॉन और उद्यमिता विकास संस्थान जैसे चयनित संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद प्रमाणपत्र सीधे ऑनलाइन बैंक को भेजा जाएगा। इसके बाद ही बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर करेगा।

क्यों बदले गए नियम?

सरकार के मुताबिक बड़ी संख्या में आवेदन तकनीकी खामियों और कमजोर प्रोजेक्ट रिपोर्ट के कारण बैंकों द्वारा खारिज किए जा रहे थे। 28 अप्रैल तक योजना के तहत करीब 5.30 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से लगभग 2.67 लाख आवेदन स्वीकृत नहीं हो सके।

बैंक अधिकारियों का कहना था कि कई आवेदनों में कारोबार की स्पष्ट जानकारी और सही प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए नई प्रशिक्षण व्यवस्था लागू की गई है।

अब पंजीकरण से पहले भी देखना होगा वीडियो

सरकार ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब आवेदकों को आवेदन से पहले आधे घंटे का काउंसलिंग वीडियो देखना अनिवार्य होगा। इसमें कारोबार शुरू करने, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने और बैंक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा विभाग की ओर से अलग-अलग सेक्टर के लिए तैयार प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

400 ट्रेनिंग कंपनियों पर बड़ा एक्शन

इधर कौशल विकास मिशन ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जांच में पाया गया कि कई कंपनियों के पास लैब और प्रशिक्षण के जरूरी संसाधन तक नहीं थे, जबकि सरकार से फंड लिया जा रहा था।

अब प्रशिक्षण की निगरानी “कौशल दृष्टि पोर्टल” के जरिए की जा रही है, जहां जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण की लाइव जानकारी और फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।

सरकार का दावा है कि इन बदलावों के बाद योजना ज्यादा पारदर्शी बनेगी और युवाओं को कारोबार शुरू करने में वास्तविक मदद मिल सकेगी।