किसानों के लिए बड़ा मौका! तालाब में मोती उगाकर कैसे होगी कमाई? जानें सरकार की योजना

उत्तर प्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अब पारंपरिक खेती के साथ मोती उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. किसान अपने तालाबों का इस्तेमाल मोती की खेती के लिए कर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. इसके लिए सरकार की ओर से मोती उत्पादन को प्रोत्साहित करने की पहल की जा रही है. इस तकनीक में तालाब के अंदर विशेष प्रकार के सीपों का पालन किया जाता है, जिनसे निर्धारित प्रक्रिया के बाद मोती तैयार होते हैं.
 

UP Pearl Farming Scheme 2026:  उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खुलने जा रहा है। अब किसान खेतों में अनाज और सब्जियों की खेती के साथ अपने तालाबों में मोती का उत्पादन भी कर सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार की मोती संवर्धन योजना के तहत तैयारियां की जा रही हैं। गोरखपुर में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 18 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। योजना के तहत किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मोती उत्पादन का प्रशिक्षण देने के साथ अपनी क्षमता के अनुसार यूनिट स्थापित करने का अवसर मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

गोरखपुर में मोती उत्पादन योजना के लिए 18 लाख का बजट

मोती संवर्धन योजना को गोरखपुर में आगे बढ़ाने के लिए 18 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। फिलहाल मत्स्य विभाग को शासन से धनराशि मिलने का इंतजार है। बजट उपलब्ध होने के बाद लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा और आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अभी इस योजना को लेकर किसानों में जागरूकता कम है और आवेदन भी अपेक्षा से कम प्राप्त हुए हैं। ऐसे में अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है।

मोती उत्पादन, आय में वृद्धि! मोती संवर्धन योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण और इकाई स्थापना के अवसर देकर अतिरिक्त आय तथा ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। #किसान_कल्याण #मोती_उत्पादन #स्वरोजगार #कृषि_नवाचार https://t.co/798d3sLBNQ

— UP Agri (@UP_Agri) November 1, 2026


15 किसानों को मिल चुका है मोती उत्पादन का प्रशिक्षण

मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2026 में गोरखपुर मंडल के 15 चयनित किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। चरगावां स्थित कृषि भवन सभागार में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ आनंद कुमार और डॉ. अय्यूब ने किसानों को मोती उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक समझाई।

इस दौरान सीप का चयन, सीप के भीतर न्यूक्लियस यानी केंद्रक प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया और तालाब के उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य किसानों को मोती उत्पादन की तकनीक से परिचित कराकर उन्हें इस व्यवसाय के लिए तैयार करना है।

2 हजार से 15 हजार सीप तक की यूनिट लगाने का विकल्प

योजना की खास बात यह है कि किसान अपनी आर्थिक क्षमता, जमीन और तालाब के आकार के अनुसार अलग-अलग क्षमता की इकाइयां स्थापित कर सकेंगे। इसके लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

  • 2 हजार सीप क्षमता: अनुमानित लागत 1.50 लाख रुपये।

  • 5 हजार सीप क्षमता: अनुमानित लागत 3.50 लाख रुपये।

  • 15 हजार सीप क्षमता: अनुमानित लागत 10 लाख रुपये।

इस व्यवस्था से छोटे और बड़े दोनों तरह के तालाब वाले किसानों को मोती उत्पादन शुरू करने का अवसर मिल सकेगा।

पूरे उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मोती संवर्धन योजना के लिए कुल 3 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। योजना का उद्देश्य तालाबों और अन्य जल स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल कर मोती उत्पादन को बढ़ावा देना है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है।

कैसे मिलेगा योजना का लाभ?

योजना के तहत लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिए जाने का प्रावधान है। गोरखपुर में शासन से बजट मिलने के बाद आवेदन और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, मोती संवर्धन योजना किसानों को खेती के साथ एक नया व्यवसाय शुरू करने का अवसर दे सकती है। हालांकि, इच्छुक किसानों को आवेदन करने से पहले मत्स्य विभाग से पात्रता, अनुदान और इकाई स्थापना से संबंधित नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।