SIR पर बंगाल में बड़ा प्रदर्शन! 2 सितंबर को 5000+ लोगों के जुटने का दावा, HC ने क्या कहा?

Kolkata: पश्चिम बंगाल में SIR के खिलाफ 2 सितंबर को प्रदर्शन की तैयारी है. संग्रामी गणमंच की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया. 
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। SIR प्रक्रिया और अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) में लंबित अपीलों की सुनवाई में कथित देरी के खिलाफ 2 सितंबर को कोलकाता में विरोध-प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शन की अनुमति को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन अदालत ने मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई याचिका समय पर दाखिल नहीं की जाती है, तो अंतिम समय में तत्काल सुनवाई की मांग करने का अधिकार नहीं बनता। अदालत ने कहा कि याचिका दाखिल होने के बाद मामले को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा।

तुरंत सुनवाई की मांग पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

शुक्रवार को मामले का उल्लेख कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से 2 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया।

इस पर अदालत ने कहा कि समय पर याचिका दाखिल नहीं किए जाने की स्थिति में अंतिम समय पर तत्काल सुनवाई की मांग नहीं की जा सकती। कोर्ट ने साफ किया कि याचिका दाखिल होने के बाद ही उसे सामान्य प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा।

अदालत की इस टिप्पणी के बाद फिलहाल 2 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर तत्काल न्यायिक राहत मिलने का रास्ता साफ नहीं हुआ है।

‘संग्रामी गणमंच’ ने किया है बड़े प्रदर्शन का ऐलान

‘संग्रामी गणमंच’ नामक संगठन ने 2 सितंबर को कोलकाता में बड़े विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन का दावा है कि प्रदर्शन में 5,000 से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

संगठन का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसके खिलाफ संबंधित अपीलीय न्यायाधिकरण में अपीलें दाखिल की गई हैं, लेकिन संगठन का दावा है कि इन अपीलों की सुनवाई में काफी देरी हो रही है।

SIR को लेकर क्यों हो रहा विरोध?

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। इसी प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच लगातार बहस चल रही है।

विरोध कर रहे संगठन का कहना है कि SIR प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और अपील के माध्यम से राहत पाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने इसी मुद्दे को लेकर 2 सितंबर को प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR प्रक्रिया से जुड़े दावों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट से मांगी गई थी तत्काल सुनवाई

प्रदर्शन की तारीख नजदीक होने के कारण संगठन की ओर से अदालत में मामले को तत्काल सुने जाने का अनुरोध किया गया। संगठन के वकील ने याचिका दाखिल करने की अनुमति के साथ-साथ मामले की संवेदनशीलता और 2 सितंबर की निर्धारित तारीख का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।

लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और मामले को सामान्य प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किए जाने की बात कही।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने याचिका देर से दाखिल किए जाने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी कार्यक्रम की तारीख पहले से तय थी और याचिका समय पर दाखिल नहीं की गई, तो अंतिम समय में अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग करने का कोई अधिकार नहीं बनता।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और 2 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

2 सितंबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर

SIR के मुद्दे पर पहले से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में 2 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल बढ़ने की संभावना है।

फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि याचिका सामान्य प्रक्रिया के तहत कब सूचीबद्ध होती है और अदालत प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।