देश में धंसे पुलों के धांधली पर बड़ा खुलासा! केरल सबसे आगे, तेलंगाना में ठेकेदार पर ₹134 करोड़ का जुर्माना
National: देशभर में हाल के वर्षों में पुलों, फ्लाईओवर और राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच पुलों और ओवरब्रिजों के धंसने या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की सबसे अधिक घटनाएं केरल में दर्ज की गईं। वहीं, निर्माण में लापरवाही के मामलों में तेलंगाना में एक ठेकेदार पर देश का सबसे बड़ा ₹134.78 करोड़ का जुर्माना लगाया गया।
संसद में उठा पुलों की गुणवत्ता का मुद्दा
संसद के मानसून सत्र के दौरान गोवा के सांसद कैप्टन विराटो फर्नांडीस ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलों, फ्लाईओवरों और सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2014 से अब तक कितने पुल या फ्लाईओवर निर्माण में लापरवाही के कारण क्षतिग्रस्त हुए और दोषी ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई की गई।
जवाब में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के मानकों का पालन कराया जाता है। निर्माण कार्य की निगरानी स्वतंत्र इंजीनियरों और संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की जाती है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा घटनाएं?
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2026 तक-
- केरल – 9 घटनाएं (देश में सबसे अधिक)
- महाराष्ट्र – 8 घटनाएं
- बिहार – 6 घटनाएं
- उत्तर प्रदेश – 2026 में ही 5 मामले
- गुजरात, जम्मू-कश्मीर, असम और दिल्ली – एक-एक प्रमुख मामला
इन घटनाओं में पुलों का धंसना, फ्लाईओवरों में तकनीकी खराबी या मुख्य ढांचे को गंभीर नुकसान शामिल है।
तेलंगाना में सबसे बड़ा जुर्माना
सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2022 में तेलंगाना में एक पुल-फ्लाईओवर परियोजना में गंभीर निर्माण खामी मिलने पर संबंधित ठेकेदार पर ₹134.78 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। यह देश में अब तक लगाया गया सबसे बड़ा जुर्माना बताया गया है।
इसके अलावा-
- मध्य प्रदेश (2025) : ₹119 करोड़ का जुर्माना
- महाराष्ट्र : 8 मामलों में कुल ₹46.33 करोड़ की पेनाल्टी
- गुजरात : एक मामले में ₹2.80 करोड़ का जुर्माना
जुर्माने के साथ ब्लैकलिस्ट और ठेके भी रद्द
मंत्रालय ने बताया कि दोषी एजेंसियों पर केवल आर्थिक दंड ही नहीं लगाया गया, बल्कि कई मामलों में ठेके रद्द किए गए, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया और उन्हें 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित किया गया।
- जम्मू-कश्मीर में एक कंपनी पर परियोजना लागत का 1% जुर्माना लगाकर ब्लैकलिस्ट किया गया।
- दिल्ली में ठेकेदार को अपने खर्च पर निर्माण सुधारने का आदेश दिया गया।
- असम में एक कंपनी को चार महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया।
- पश्चिम बंगाल में एक परियोजना में तकनीकी खराबी के बाद संबंधित मार्ग को अस्थायी रूप से टोल फ्री कर दिया गया।
- उत्तर प्रदेश में कई मामलों में निर्माण कंपनी का ठेका समाप्त कर परियोजना प्रबंधकों और इंजीनियरों को निलंबित किया गया।
हाईवे निर्माण में गुणवत्ता पर सरकार का दावा
नितिन गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता। सभी परियोजनाएं IRC मानकों के अनुरूप बनाई जाती हैं और निर्माण के हर चरण की तकनीकी निगरानी की जाती है। यदि कहीं लापरवाही या तकनीकी खामी मिलती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
जलभराव और भूस्खलन भी बड़ी चुनौती
मंत्रालय के अनुसार हाईवे के आसपास जलभराव केवल निर्माण की कमी से नहीं होता। इसके पीछे ड्रेनेज सिस्टम की खराब स्थिति, नालों की सफाई न होना, अत्यधिक बारिश, अवैध निर्माण और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती हैं।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम और गोवा जैसे राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन की कई घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।
हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में कई राज्यों में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। उत्तर प्रदेश में हाल ही में उद्घाटन हुए कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कई हिस्से पहली बारिश में धंस गए। उत्तराखंड के देहरादून में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी पुलों और ओवरब्रिजों में तकनीकी खराबी के मामले सामने आए।
इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने दोहराया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता करने वाली एजेंसियों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।