यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर: बीजेपी को झटका देकर सपा में लौटे 6 बार के मंत्री प्रो. राम आसरे कुशवाहा, मुलायम युग की यादें ताजा कर बदली सियासी चाल
UP News: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच पाला बदलने का दौर तेजी से शुरू हो गया है। इसी कड़ी में प्रदेश की राजनीति के जाने-माने और कद्दावर ओबीसी चेहरे, छह बार मंत्री रह चुके प्रो. राम आसरे कुशवाहा ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने गुरुवार को बीजेपी को अलविदा कहते हुए एक बार फिर समाजवादी पार्टी का हाथ थाम लिया है। उनकी इस घर वापसी से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के कयास लगाए जा रहे हैं।
अध्यापन से लेकर सियासत के शिखर तक का सफर:
कानपुर नगर में 5 फरवरी 1953 को जन्मे प्रो. राम आसरे कुशवाहा ने राजनीति में आने से पहले अध्यापन कार्य किया था। वाणिज्य में स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले कुशवाहा ने 1986 में कुशवाहा कल्याण परिषद के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक जीवन में अपनी पहचान बनाई थी। साल 1996 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कानपुर के सरसौल क्षेत्र से बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर मुख्यधारा की राजनीति में धमाकेदार एंट्री की थी। वे कल्याण सिंह सरकार में 1997 में एससी-एसटी कल्याण मंत्री भी रह चुके हैं और अपने राजनीतिक करियर में कुल छह बार मंत्री पद संभाल चुके हैं।
2013 का विवाद और अब सपा में नई पारी:
अपने लंबे राजनीतिक सफर में प्रो. कुशवाहा का नाता समाजवादी पार्टी से भी रहा है। साल 2013 में उन्हें सपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर कुशवाहा समाज को जोड़ने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, उसी साल कुछ विवादित बयानों के चलते तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया था और वे पार्टी से दूर हो गए थे। इसके बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया था।
मुलायम सिंह को याद कर सपा को मजबूत करने का संकल्प:
गुरुवार को सपा में वापसी करते हुए प्रो. राम आसरे कुशवाहा ने दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव को याद किया और अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी को मजबूती देने का संकल्प जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह दांव आगामी चुनावों में ओबीसी वोटों को साधने और समाजवादी पार्टी की जमीन को और मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।