बिहार को रेलवे की बड़ी सौगात: पुनारख–किउल के बीच तीसरी-चौथी लाइन को हरी झंडी, ₹2,668 करोड़ का निवेश

 
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में बिहार के लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा बड़ा फैसला लिया गया। राज्य के व्यस्त रेल मार्ग पुनारख और किउल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर ₹2,668 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस विस्तार से बिहार के रेल नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी। यह रूट पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, ऐसे में अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से ट्रैफिक दबाव कम होगा और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा।

झारखंड-बिहार को जोड़ेगा गम्हरिया–चंदिल प्रोजेक्ट

कैबिनेट ने गम्हरिया और चंदिल के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की भी मंजूरी दी है। ₹1,168 करोड़ की इस परियोजना से झारखंड और बिहार के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। खनिज और औद्योगिक सामान की ढुलाई तेज और सुगम होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य

सरकार ने इन रेल परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार इन योजनाओं से देश के करीब 5,407 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। अनुमान है कि बिहार समेत आसपास के राज्यों की लगभग 98 लाख आबादी को तेज और भरोसेमंद रेल सेवा का सीधा फायदा मिलेगा।

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

तीसरी और चौथी लाइन जुड़ने से सबसे बड़ा असर भीड़भाड़ कम होने पर पड़ेगा। बिहार में पैसेंजर ट्रेनों की संख्या अधिक होने के कारण अक्सर देरी की समस्या रहती है। नई लाइनों से ट्रेनों की लेटलतीफी घटेगी और यात्री सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही से औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

रेलवे के साथ अन्य इंफ्रा परियोजनाओं को भी मंजूरी

कैबिनेट ने अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी है:
    •    Srinagar Airport पर ₹1,667 करोड़ की लागत से नया एकीकृत टर्मिनल भवन।
    •    Ahmedabad Metro के फेज-2B विस्तार पर ₹1,067 करोड़ की मंजूरी।
    •    गोंडिया–जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए ₹5,236 करोड़ का निवेश।

केंद्र सरकार के इन फैसलों से बिहार के रेल ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, जो यात्री सुविधा और औद्योगिक विकास दोनों के लिए अहम साबित होगा।