भाजपा ने अतुल सिंह को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, लगातार तीसरी बार जिला मयूर विहार का मीडिया प्रभारी नियुक्त किया

New Delhi: अतुल सिंह ने वर्ष 2000 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी. पिछले 25 वर्षों से वे संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियानों और पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. इस दौरान उन्होंने संगठन की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है.
 

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्वांचल समाज के प्रमुख नेता और बिहार के छपरा से संबंध रखने वाले अतुल सिंह को एक बार फिर बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी ने उन्हें लगातार तीसरी बार जिला मयूर विहार का मीडिया प्रभारी नियुक्त किया है. इसे संगठन द्वारा उनके लंबे अनुभव, सक्रिय कार्यशैली और पार्टी के प्रति समर्पण पर जताए गए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है.

अतुल सिंह ने वर्ष 2000 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी. पिछले 25 वर्षों से वे संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियानों और पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. इस दौरान उन्होंने संगठन की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है.

भाजपा संगठन में वे कोंडली मंडल के उपाध्यक्ष और महामंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली प्रदेश पूर्वांचल मोर्चा के प्रदेश मंत्री, दिल्ली प्रदेश इंजीनियरिंग सेल के सह-संयोजक, जिला मयूर विहार के मीडिया प्रभारी तथा मीडिया प्रभारी एवं पूर्वांचल मोर्चा प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारियां भी संभाली हैं. अब लगातार तीसरी बार जिला मयूर विहार का मीडिया प्रभारी बनाए जाने से संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और नेतृत्व का विश्वास एक बार फिर स्पष्ट हुआ है.

पेशेवर जीवन में भी अतुल सिंह को 28 वर्षों का प्रशासनिक और प्रबंधन अनुभव प्राप्त है. उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रबंधन, प्रशासन, टीम नेतृत्व, जनसंपर्क, मीडिया समन्वय और संगठन संचालन जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है. उनके इस अनुभव का लाभ भाजपा संगठन को भी लगातार मिलता रहा है.

पूर्वांचल समाज के बीच सक्रिय पहचान रखने वाले अतुल सिंह दिल्ली में पार्टी संगठन को मजबूत करने, भाजपा की नीतियों और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा मीडिया के माध्यम से पार्टी का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में लगातार सक्रिय रहे हैं. उनकी पुनर्नियुक्ति को संगठन में उनकी स्वीकार्यता और नेतृत्व के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.