ममता बनर्जी के ‘5 पांडव’ वाले बयान पर चंद्रशेखर बावनकुले का पलटवार, कहा- कौरवों की फौज आपके पास...

Mamata Banerjee Over Kauravas Pandavas Statement: ''कौरवों की राजनीति ममता बनर्जी करती हैं, हम नहीं करते हैं. हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी जो सच्चाई की, ईमानदारी की, पारदर्शी बात करके चुनाव लड़ना चाहते हैं. ममता बनर्जी कौरव जैसे बूथ कैप्चर करके चुनाव जीतना चाहती हैं. बंगाल चुनाव में दिखेगा की जनता किसके साथ है.'' उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र बीजेपी के विधायक, सांसद, मंत्री और बीजेपी के पदाधिकारी केरल व बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए भी जाएंगे.
 

Mamata Banerjee Over Kauravas Pandavas Statement: भारतीय राजनीति में एक बार फिर महाभारत की उपमाओं के जरिए सियासी वार-पलटवार तेज हो गया है. ममता बनर्जी के ‘5 पांडव’ वाले बयान पर चंद्रशेखर बावनकुले ने करारा जवाब देते हुए राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है.

क्या था ममता बनर्जी का बयान

एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि

“हमारे पांच पांडव ही काफी हैं, कौरवों की फौज उनके पास है।”

ममता बनर्जी के इस बयान को विपक्षी दलों ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर सीधा तंज माना. उनके समर्थकों का कहना है कि ममता ने यह बात सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत इरादों के संदर्भ में कही.

बावनकुले का तीखा जवाब

ममता बनर्जी के इस बयान पर महाराष्ट्र बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने पलटवार करते हुए कहा कि

“अगर पांच पांडव काफी होते, तो जनता बार-बार सच्चाई सामने क्यों लाती? देश जानता है कि कौन पांडव है और कौन कौरव।”

बावनकुले ने कहा कि ममता बनर्जी खुद को धर्म और आस्था की भाषा से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन जनता अब सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि काम से फैसला करती है.

बीजेपी का आरोप: भ्रम फैलाने की राजनीति

बीजेपी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी का यह बयान राजनीतिक भ्रम फैलाने और जनता को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने की कोशिश है. पार्टी का आरोप है कि महाभारत जैसे पवित्र ग्रंथ के प्रतीकों का इस्तेमाल सिर्फ सियासी फायदे के लिए किया जा रहा है.

तृणमूल का पलटवार

वहीं तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी की प्रतिक्रिया को अनावश्यक बताया है. उनका कहना है कि ममता बनर्जी ने यह बयान सांकेतिक रूप से संघर्ष और साहस को दर्शाने के लिए दिया था, न कि किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए.

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी बयानबाजी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं की भाषा और बयान और तीखे होते जा रहे हैं. पांडव-कौरव जैसी उपमाएं अब सियासी हथियार बनती जा रही हैं, जिससे समर्थकों को जोश तो मिलता है, लेकिन राजनीतिक टकराव भी बढ़ता है.

जनता की नजर असली मुद्दों पर

हालांकि, आम जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि नेताओं को ऐसे बयानों से ज्यादा महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए. सोशल मीडिया पर भी लोग इस सियासी बयानबाजी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं. ममता बनर्जी के ‘5 पांडव’ बयान और चंद्रशेखर बावनकुले के पलटवार ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक जुबानी जंग और तेज होगी. अब देखना होगा कि यह बयानबाजी वोटरों को कितना प्रभावित कर पाती है और असली मुद्दे कितने केंद्र में रहते हैं.