मिट्टी के हुनर ने बदली राजन प्रजापति की तकदीर, टेराकोटा से खड़ा किया डेढ़ करोड़ का कारोबार
UP News: कभी सीमित संसाधनों के बीच पारंपरिक टेराकोटा कला को आगे बढ़ाने वाले गोरखपुर के राजन प्रजापति आज इसी हुनर को कारोबार में बदलकर नई पहचान बना चुके हैं। एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना से मिली तकनीकी और बाजार संबंधी मदद ने उनके काम को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई। अब उनका कारोबार करीब 1.5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच गया है और उनकी इकाई में 25 से अधिक कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।
गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलरिहा गांव निवासी राजन प्रजापति टेराकोटा कला से लंबे समय से जुड़े हैं। पारंपरिक मिट्टी के शिल्प को आधुनिक बाजार की जरूरतों के मुताबिक ढालते हुए उन्होंने अपने कारोबार को धीरे-धीरे बड़े स्तर तक पहुंचाया।
राष्ट्रपति पुरस्कार से कारोबार तक का सफर
राजन प्रजापति को टेराकोटा कला के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके लिए यह सम्मान केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी बना।
ODOP योजना के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, आधुनिक उपकरण और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलने के बाद उनके काम की गति बढ़ी। इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता में इजाफा हुआ और उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
देश के कई राज्यों तक पहुंच रहे टेराकोटा उत्पाद
राजन की इकाई में तैयार टेराकोटा के उत्पाद अब गोरखपुर तक सीमित नहीं हैं। देश के कई बड़े शहरों और राज्यों में इनकी आपूर्ति की जा रही है। त्योहारों के मौसम में उनकी इकाई से 18 से 24 ट्रक तक टेराकोटा उत्पाद अलग-अलग राज्यों के लिए भेजे जाते हैं।
गोरखपुर के टेराकोटा को मिला GI टैग भी इस पारंपरिक कला की पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इससे स्थानीय शिल्प को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
खुद आगे बढ़े, अब दूसरों को भी सिखा रहे हुनर
राजन प्रजापति की कार्यशाला अब केवल उत्पादन केंद्र नहीं रह गई है। यहां युवाओं को टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखाने का काम भी किया जाता है। इससे एक तरफ पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है, वहीं युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी मिल रहा है।
उनकी कहानी यह बताती है कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और सही बाजार मिले तो वह रोजगार का मजबूत जरिया बन सकता है।
ODOP से स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बाजार
उत्तर प्रदेश सरकार की ODOP योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को पहचान दिलाना, कारीगरों और उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
इसके तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, आधुनिक उपकरण और मार्केटिंग जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जाता है। गोरखपुर का टेराकोटा इसी पहल के तहत पारंपरिक कला से आधुनिक कारोबार तक के सफर का उदाहरण बनकर सामने आया है।
राजन प्रजापति की सफलता यह भी दिखाती है कि मिट्टी से जुड़ा सदियों पुराना हुनर भी तकनीक, बाजार और सरकारी सहयोग के साथ बड़े कारोबार और रोजगार का आधार बन सकता है।