CM योगी का दावा- साढ़े 9 लाख नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से हुईं, बोले- यूपी बीमार नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी

 

 

UP News: उत्तर प्रदेश में नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मौजूदा भर्ती व्यवस्था को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक साढ़े 9 लाख नियुक्ति-पत्र पारदर्शी तरीके से वितरित किए जा चुके हैं और इसके परिणाम सामने दिखाई दे रहे हैं।

लखनऊ में UPPSC और UPSSSC के माध्यम से विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र देने के कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोगों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता रहने से युवाओं को योग्यता के आधार पर अवसर मिल रहे हैं।

‘2017 से पहले हर दूसरे दिन दंगे होते थे’

मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की प्रदेश की स्थिति का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दौर में उत्तर प्रदेश में लगातार दंगे होते थे और कई जगहों पर लंबे समय तक कर्फ्यू रहता था। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आम लोगों के साथ-साथ युवाओं के सामने भी असुरक्षा का माहौल था।

योगी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने भर्ती बोर्ड और आयोगों में अपने करीबी लोगों को नियुक्त कर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

‘भर्ती प्रक्रिया पर युवाओं का भरोसा टूटा’

सीएम योगी ने कहा कि पिछली व्यवस्था में भर्तियों में कथित अनियमितताओं के कारण युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ। उन्होंने दावा किया कि रोजगार के सीमित अवसरों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के चलते बड़ी संख्या में युवाओं को प्रदेश से बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय युवाओं के सामने रोजगार के लिहाज से मुश्किल परिस्थितियां थीं। उन्होंने इसे पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की क्षमता में कमी नहीं थी, बल्कि शासन की सोच और व्यवस्था में समस्या थी।

‘यूपी बीमार नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी’

अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक ‘बीमारू राज्य’ कहे जाने के संदर्भ में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वयं बीमार नहीं था, बल्कि पिछली सरकारों की मानसिकता और कार्यप्रणाली में समस्या थी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट कार्यप्रणाली और खराब शासन व्यवस्था के कारण प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का जोर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और युवाओं को योग्यता के आधार पर अवसर देने पर है। साढ़े 9 लाख नियुक्ति-पत्र बांटे जाने का आंकड़ा इसी दिशा में सरकार की उपलब्धि के तौर पर उन्होंने सामने रखा।