CM योगी बोले- ताकत मिलते ही उद्दंड न हो जाए लोक सेवक, जवाबदेही तय करने के लिए जरूरी है लोकायुक्त

 

 

 

UP News: लोक आयुक्त संगठन, उत्तर प्रदेश के 50वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की जरूरत और उनकी भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि देश में लोकपाल और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की स्थापना की मांग लंबे समय से उठती रही है। उस दौर में यह व्यवस्था जितनी जरूरी थी, आज भी इसकी उतनी ही आवश्यकता बनी हुई है।

लोक सेवकों पर जरूरी है जवाबदेही का अंकुश

सीएम योगी ने कहा कि किसी भी लोक सेवक के गलत आचरण की स्थिति में संभव है कि किसी स्तर पर उसे बचाने की कोशिश की जाए, लेकिन जब शिकायत लोकायुक्त संगठन तक पहुंचती है तो मामले को उसकी मेरिट के आधार पर देखा जा सकता है। इससे जनता के प्रति जवाबदेह अधिकारियों और लोक सेवकों की जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि सत्ता और अधिकार मिलने के बाद कई बार व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। शक्ति मिलने पर कुछ लोग मर्यादा भूलकर उद्दंड या मनमाना व्यवहार करने लगते हैं। ऐसे में एक ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जो उन्हें उनकी जिम्मेदारियों और निर्धारित मर्यादाओं का एहसास कराती रहे।

‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकार और शक्ति व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए लोक सेवकों के लिए जवाबदेही के साथ नैतिक मूल्यों और मर्यादाओं का पालन भी जरूरी है।

सीएम योगी ने कहा कि लोकायुक्त जैसी संस्था सिर्फ शिकायतों के निस्तारण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोक सेवकों को उनकी जिम्मेदारी और जनता के प्रति जवाबदेही का एहसास कराने वाली व्यवस्था भी है।

संविधान निर्माताओं की भावना से जुड़ी व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक सेवकों के आचरण में मर्यादा, जवाबदेही और नैतिकता बनाए रखने की जरूरत भारतीय संविधान की मूल भावना से भी जुड़ी हुई है। उनके मुताबिक, संविधान निर्माताओं की सोच में ऐसी व्यवस्था की कल्पना थी, जिसमें शासन व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह रहे और अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित मूल्यों और मर्यादाओं के भीतर हो।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की भूमिका तभी सार्थक होती है, जब वे आम नागरिक के विश्वास पर खरी उतरें और गलत आचरण के खिलाफ निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई का रास्ता उपलब्ध कराएं।