शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का संदेश- ‘चुनावी प्रतिस्पर्धा नहीं, समय से है हमारी होड़’, बोले- शिक्षक चूका तो बच्चे का बचपन लौटकर नहीं आएगा
UP News: शिक्षक दिवस के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की जिम्मेदारी और स्कूलों में हुए बदलाव को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षक की असली प्रतिस्पर्धा किसी राजनीतिक दल या चुनावी मुद्दे से नहीं, बल्कि समय से है। आज जिस बच्चे को शिक्षक पढ़ा रहा है, उसके भविष्य को संवारने का अवसर दोबारा नहीं मिलेगा।
गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 दिया गया, जबकि माध्यमिक शिक्षा के पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाने वालों में 33 महिला शिक्षक भी शामिल रहीं।
‘बच्चे का बचपन दोबारा नहीं आएगा’
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि समय लगातार आगे बढ़ रहा है और शिक्षकों को भी उसके साथ खुद को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को आज शिक्षक पढ़ा रहा है, अगर उसके भविष्य को लेकर कोई चूक हो गई तो उसका बचपन दोबारा वापस नहीं आएगा। इसलिए शिक्षकों को समय के अनुसार नई तकनीक सीखने, सही निर्णय लेने और खुद को लगातार अपडेट करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति के बजाय बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। विद्यालय ऐसे स्थान हैं, जहां आने वाली पीढ़ी का निर्माण होता है।
फर्जी वीडियो को लेकर विपक्ष पर निशाना
स्कूलों की स्थिति को लेकर सामने आने वाली कुछ तस्वीरों और वीडियो पर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने एक वीडियो की जांच का उदाहरण देते हुए कहा कि जांच में एक जर्जर भवन का चित्र नागपुर का पाया गया, जिसे झांसी के नाम से प्रचारित किया जा रहा था।
मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि कहीं का वीडियो किसी दूसरे स्थान के नाम पर दिखाकर लोगों को भ्रमित करना उचित नहीं है।
‘बयान देना आसान, बदलाव करना मुश्किल’
सीएम योगी ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सरकार की ओर से किए गए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ बयान देना आसान होता है, लेकिन 1.60 लाख बच्चों के खातों में DBT के माध्यम से राशि पहुंचाना, संस्कृत शिक्षा में छठी कक्षा से आचार्य स्तर तक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से जोड़ना और प्रोजेक्ट अलंकार व ऑपरेशन कायाकल्प जैसे अभियान लागू करना आसान काम नहीं है।
उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छठी से 12वीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों से प्रदेश के लाखों बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आया है और यह परिवर्तन सभी को दिखाई देना चाहिए।
‘शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने वाला नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है। वह विद्यार्थियों का मार्गदर्शक भी है। शिक्षक के व्यवहार और कार्यशैली का सीधा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए बच्चों में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना जरूरी है। हर विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षक को उसकी प्रतिभा पहचानकर उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
संसाधनों से ज्यादा जरूरी इच्छाशक्ति
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्कूलों में बेहतर संसाधन जरूरी हैं, लेकिन शिक्षक की इच्छाशक्ति और काम के प्रति समर्पण उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीमित संसाधनों में नए प्रयोग करके अपने विद्यालयों की तस्वीर बदलने वाले शिक्षकों की सराहना की।
उन्होंने ऐसे नवाचारों को दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को उनका लाभ मिल सके।
तकनीक शिक्षा का विकल्प नहीं, सहयोगी है
बदलती तकनीक का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से समय की जरूरत के मुताबिक खुद को अपडेट रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा की जगह नहीं ले सकती, बल्कि उसे बेहतर बनाने का माध्यम है।
सही तरीके से तकनीक के इस्तेमाल से पढ़ाई को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से नई तकनीकों और बदलते शिक्षण तरीकों को अपनाने का आह्वान किया।
पुरस्कार के साथ मिलेंगी अतिरिक्त सुविधाएं
राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई। इसके अलावा ऐसे शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि का प्रावधान है।
पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में हर वर्ष 4,000 किलोमीटर तक निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी।
समारोह में हिस्सा लेने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित शिक्षक गोरखपुर पहुंचे थे। शासन की ओर से उनके ठहरने की व्यवस्था विशिष्ट अतिथियों के रूप में होटलों में की गई थी।