नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस की एंट्री, मिलन प्रधान को उतारा; ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस

 

 

 

Kolkata Political News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद शुक्रवार को उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया।

दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर, नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर और नाम वापसी की आखिरी तारीख 19 सितंबर तय की गई है।

नंदीग्राम पर सबसे ज्यादा नजर

कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा के बाद नंदीग्राम का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कभी ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा नंदीग्राम अब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

2021 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच बेहद चर्चित मुकाबला हुआ था। उस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया था। इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की।

इस बार शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखते हुए नंदीग्राम विधानसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से नंदीग्राम में उपचुनाव की स्थिति बनी है।

क्या नंदीग्राम से फिर उतरेंगी ममता?

नंदीग्राम उपचुनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद इस सीट से चुनाव लड़ेंगी। फिलहाल उनकी ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एक धड़े की ओर से ममता बनर्जी से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अपील की जा चुकी है। इस धड़े ने यह भी संकेत दिया है कि यदि ममता बनर्जी मैदान में उतरती हैं तो उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा।

ऐसे में ममता बनर्जी की संभावित उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। लेकिन जब तक टीएमसी या ममता बनर्जी की ओर से कोई औपचारिक ऐलान नहीं होता, इसे केवल राजनीतिक अटकल ही माना जाएगा।

रेजीनगर में भी मुकाबला होगा रोचक

मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट भी विधायक के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। यहां से आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने रेजीनगर के साथ नवदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। दो सीटों से जीत के बाद रेजीनगर सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।

कांग्रेस ने इस सीट पर मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उतारकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। मुर्शिदाबाद की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए रेजीनगर का परिणाम भी विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीएमसी के अंदरूनी विवाद पर भी रहेगी नजर

नंदीग्राम का उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो धड़ों के बीच विवाद की चर्चा है। दोनों पक्ष पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर अपना दावा जता रहे हैं। ऐसे में इस अंदरूनी खींचतान का असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

कांग्रेस के उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद नंदीग्राम का मुकाबला अब और बहुकोणीय होने की संभावना है। भाजपा की पकड़, टीएमसी की रणनीति, कांग्रेस-वाम दलों की भूमिका और ममता बनर्जी की संभावित उम्मीदवारी—इन सभी फैक्टर पर चुनावी समीकरण निर्भर करेगा।

दुर्गापूजा से पहले होगा बड़ा राजनीतिक मुकाबला

नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा का माहौल शुरू होने वाला होगा। लिहाजा राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है।

खासकर नंदीग्राम का नतीजा यह संकेत दे सकता है कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा और तृणमूल के बीच राजनीतिक समीकरण किस दिशा में बढ़ रहे हैं। कांग्रेस के उम्मीदवारों के ऐलान के साथ चुनावी तस्वीर का पहला हिस्सा साफ हो गया है। अब भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद मुकाबले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।