देबजीत सरकार का ममता सरकार पर तीखा हमला, बोले– लोकतंत्र को कमजोर करने वाली बयानबाज़ी बर्दाश्त नहीं
देबजीत सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिया गया बयान लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जिसकी सूचना राज्य के मुख्य सचिव को भी दी गई है।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से कहा कि संबंधित अधिकारियों को बिना पर्याप्त अवसर दिए निलंबित किया गया है और पार्टी अपने स्तर पर उन्हें संरक्षण देगी। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्था के निर्णय को राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर जोर
देबजीत सरकार ने कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि आयोग की ओर से जारी पत्र में निलंबन के स्पष्ट कारण दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में मतदाता सूची को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और अवैध तरीके से नाम जोड़ने या हटाने की कोशिशों पर आयोग को सख्ती बरतनी चाहिए।
डिजिटल प्रचार और कानून-व्यवस्था पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने सत्तारूढ़ दल के डिजिटल प्रचार तंत्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने की कोशिश हो रही है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी कार्यालयों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं भी हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि आगामी चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराए जाएं और प्रत्येक वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित किया जाए।
भाजपा ने साफ किया कि वह चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के समर्थन में खड़ी है तथा किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।