‘ब्रज की खोज’ से खुलेगा इतिहास का नया पन्ना, पुरातत्व परिषद और BRISEC-CCI के बीच हुआ MoU
New Delhi: ब्रज क्षेत्र के इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक विरासत को वैज्ञानिक तरीके से सामने लाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। ‘ब्रज की खोज’ (Discovering Braj) परियोजना के लिए भारतीय पुरातत्व परिषद, नई दिल्ली और ब्रिसेक चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BRISEC-CCI) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इस पहल के तहत ब्रज के प्राचीन स्थलों से लेकर कला, मंदिर स्थापत्य, धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति तक का अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
यह MoU 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित कार्यक्रम में साइन किया गया। परियोजना का फोकस ब्रज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को शोध के आधार पर समझने, संरक्षित करने और व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने पर रहेगा।
पुरातत्व परिषद करेगी शोध और सर्वेक्षण को दिशा
समझौते के तहत भारतीय पुरातत्व परिषद अपनी अकादमिक और पुरातात्विक विशेषज्ञता के जरिए परियोजना के सर्वेक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण में मार्गदर्शन देगी। वहीं BRISEC-CCI संस्थागत समन्वय के साथ वित्तीय सहयोग, CSR और कॉर्पोरेट फंडिंग जुटाने तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाओं में सहयोग करेगा।
कार्यक्रम में शिक्षा, इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति से जुड़े कई प्रमुख लोगों की मौजूदगी रही। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. (डॉ.) मुरली मनोहर जोशी, सुरेश सोनी, डॉ. कृष्ण गोपाल, ABISY के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय और हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष प्रो. शंकर कुमार सान्याल समेत कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम से जुड़े आमंत्रित अतिथियों में पूर्व सांसद तरुण विजय, मथुरा सांसद हेमा मालिनी, BRISEC-CCI के सह-अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, INTACH के सदस्य सचिव (सेवानिवृत्त IAS) रविंद्र सिंह, वृंदावन रिसर्च इंस्टिट्यूट के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी, चेयरमैन रविंद्र दत्त पालिवाल, ASI के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. एस.के. मंजुल, भारतीय पुरातत्व परिषद की कोषाध्यक्ष डॉ. आशा जोशी, ASI के महानिदेशक यदुवीर सिंह रावत, मेरठ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. विनय गुप्ता और INTACH के चेयरमैन डॉ. अशोक सिंह ठाकुर सहित अन्य विद्वान शामिल थे।
प्राचीन स्थलों की होगी मैपिंग, GIS से भी अध्ययन
‘ब्रज की खोज’ परियोजना में क्षेत्र के प्राचीन स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, मंदिरों, तीर्थ मार्गों और अन्य सांस्कृतिक स्थलों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इन स्थलों का मैपिंग, GIS आधारित अध्ययन और वैज्ञानिक अभिलेखीकरण भी प्रस्तावित है।
जरूरी अनुमति मिलने के बाद चयनित पुरातात्विक टीलों और स्थलों पर अन्वेषण तथा संभावित उत्खनन की दिशा में भी अध्ययन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य सिर्फ पुरातात्विक अवशेषों को दर्ज करना नहीं, बल्कि उनसे जुड़े इतिहास और सांस्कृतिक संदर्भ को भी व्यवस्थित तरीके से सामने लाना है।
मूर्तिकला से लोक परंपराओं तक पर रहेगा फोकस
परियोजना के तहत ब्रज की मूर्तिकला, स्थापत्य कला, अभिलेख, लोक परंपराओं और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का भी अध्ययन किया जाएगा। शोध से सामने आने वाली जानकारी को प्रकाशित करने और आम लोगों के बीच ब्रज की विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने की योजना है।
कृष्ण परंपरा से लेकर प्राचीन कला तक समृद्ध विरासत
ब्रज क्षेत्र का सांस्कृतिक महत्व मथुरा और आसपास के इलाकों तक फैली लंबी ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा है। मथुरा को प्राचीन काल से ही कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। शुंग, कुषाण और गुप्त काल में यहां की कला परंपरा के विकास के प्रमाण मिलते हैं। क्षेत्र में हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े पुरातात्विक और मूर्तिकला अवशेष भी मिले हैं।
वहीं वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव, राधाकुंड, महावन और बलदेव जैसे क्षेत्र मध्यकालीन वैष्णव भक्ति, मंदिर स्थापत्य और तीर्थ परंपरा के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित हुए।
ASI समेत कई संस्थानों के साथ मिलकर होगा काम
‘ब्रज की खोज’ परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय पुरातत्व परिषद के साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग और वृंदावन रिसर्च इंस्टिट्यूट सहित संबंधित संस्थानों के सहयोग की योजना है।
परियोजना के जरिए ब्रज की प्राचीन सभ्यता, पुरातात्विक स्थलों, कला और सांस्कृतिक परंपराओं को शोध एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही इस विरासत को संरक्षित करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।