‘DM-SP भी कोर्ट के आदेश से ऊपर नहीं’: हाईकोर्ट का कड़ा संदेश, अवहेलना को बताया अक्षम्य अपराध
आदेश की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी
खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जहां पुलिस अधिकारियों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के निर्देशों की अनदेखी का आरोप था। कोर्ट ने माना कि संबंधित अधिकारियों ने न केवल आदेश का पालन नहीं किया, बल्कि पर्याप्त कारण भी पेश नहीं कर सके। अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया।
अवैध गिरफ्तारी और CCTV फुटेज का मामला
मामला एक आरोपी की कथित अवैध गिरफ्तारी और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज प्रस्तुत न करने से जुड़ा था। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ आदेश की अवहेलना नहीं, बल्कि नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से भी जुड़ा गंभीर सवाल है। न्यायालय ने दो टूक कहा कि अदालतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं और वे आंख मूंदकर नहीं बैठ सकतीं।
जिला न्यायपालिका की भूमिका पर जोर
अदालत ने टिप्पणी की कि जिला न्यायिक अधिकारी न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके आदेशों का सम्मान करना प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है। आदेशों की अनदेखी कानून के शासन को कमजोर करती है।
मुआवजे का निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही यह भी कहा कि संबंधित पुलिस कर्मियों से यह राशि वसूलने की स्वतंत्रता सरकार के पास होगी।
इस सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल है। हाईकोर्ट के इस संदेश को न्यायपालिका की सर्वोच्चता और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है।