बंगाल में शुरू हुआ दुर्गोत्सव, रंग-बिरंगे पंडालों में उमड़ रही भक्तों की भीड़
Kolkata Durga Puja 2026: पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को महाषष्ठी के साथ दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत हो गई। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पूजा पंडालों में पारंपरिक अनुष्ठान किए गए। कोलकाता में सुबह से ही श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पंडालों की आकर्षक सजावट देखने के लिए पहुंचने लगे। पारंपरिक मोहल्ला पूजा से लेकर खास थीम पर तैयार किए गए भव्य पंडालों तक, हर तरफ उत्सव की रौनक नजर आने लगी है।
कल्पारंभ अनुष्ठान के साथ शुरू हुई पूजा
महाषष्ठी के दिन दुर्गा पूजा की शुरुआत में ‘कल्पारंभ’ अनुष्ठान का विशेष महत्व है। पूजा पंडालों में इस परंपरा के तहत धार्मिक विधियां पूरी की गईं। इस दौरान माताओं ने अपने बच्चों की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कुशलता के लिए प्रार्थना की।
अनुष्ठानों के साथ ही पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी। दुर्गा पूजा के अगले दिनों में भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
क्या है बोधन अनुष्ठान का महत्व?
दुर्गा पूजा के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में ‘बोधन’ का खास स्थान है। इसे देवी दुर्गा के प्रतीकात्मक जागरण और आह्वान से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण से युद्ध के दौरान देवी दुर्गा का असामान्य समय पर आह्वान किया था। इसी परंपरा को ‘अकाल बोधन’ कहा जाता है।
महाषष्ठी के अवसर पर होने वाले ये अनुष्ठान दुर्गोत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
कोलकाता के पंडालों में बढ़ने लगी चहल-पहल
महाषष्ठी की सुबह से ही कोलकाता के विभिन्न इलाकों में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। पारंपरिक पूजा पंडालों के साथ-साथ अनूठी सजावट और विशेष विषयों पर आधारित पंडाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
दुर्गा पूजा बंगाल के सबसे प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। इन दिनों पूजा-अर्चना के साथ कला, शिल्प, सजावट और सामुदायिक उत्सव की झलक भी देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दी शुभकामनाएं
महाषष्ठी के अवसर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में इस पावन अवसर पर सभी के लिए मंगलकामना की।
महाषष्ठी के साथ शुरू हुआ दुर्गोत्सव अब आने वाले दिनों में और भव्य रूप लेगा। श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-अर्चना और पंडालों की रौनक का आनंद लेने के लिए उत्साहित हैं।