फिर मंडराया बाढ़ का खतरा! तिब्बत-नेपाल सीमा पर फिर फूटी झील! चीन ने लोगों को 1 KM दूर रहने को कहा
Tibet-Nepal Border: तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक बार फिर बड़ी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। भूस्खलन के बाद बनी एक बैरियर झील में पानी बढ़ने और उसके ओवरफ्लो होने के बाद चीन ने तिब्बत के केरुंग (Gyirong) इलाके में चल रहे बचाव अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है। चीनी अधिकारियों ने रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल से कम से कम एक किलोमीटर दूर हटने का निर्देश दिया है।
चीन के सरकारी प्रसारक CCTV के मुताबिक, भारी मलबे से बनी झील का पानी उस दिशा में बहने लगा है जहां बचाव दल काम कर रहे थे। नए सिरे से बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए सभी रेस्क्यू टीमों को सुरक्षित स्थान पर रुकने और आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा गया है।
नेपाल में भी हाई अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
तिब्बत की ओर पानी के बहाव और संभावित झील टूटने की सूचना के बाद नेपाल में भी प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। नेपाल पुलिस ने बचाव और राहत कार्य में लगे सुरक्षाकर्मियों, रेस्क्यू टीमों और आम लोगों से तत्काल सतर्क रहने की अपील की है।
नदी किनारे और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि बैरियर झील का बांध अचानक टूटता है तो नीचे की ओर बसे इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है।
कैसे बनी इतनी खतरनाक झील?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटकर नदी में गिरने से भारी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर आया। इससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और मलबे के पीछे पानी जमा होकर एक अस्थायी बैरियर झील बन गई।
बाद में पानी का दबाव बढ़ने और झील के भरने से इसके ओवरफ्लो होने का खतरा पैदा हुआ। इसी वजह से चीन ने राहत और बचाव कार्य को फिलहाल रोक दिया है। अधिकारियों का अनुमान है कि लगातार बारिश के कारण आने वाले दिनों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है।
पहले ही हो चुकी है भारी तबाही
तिब्बत-नेपाल सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। तेज बहाव के साथ पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया, जिससे सड़कें, पुल, घर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
नेपाल में पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। दोनों देशों में बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
फिर बाढ़ आई तो बढ़ सकती है मुश्किल
सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि अगर भूस्खलन से बनी झील का पानी अचानक नीचे की ओर बहा या उसका अस्थायी बांध टूट गया, तो पहले से तबाह इलाकों में एक और फ्लैश फ्लड आ सकती है। इसी आशंका को देखते हुए चीन ने रेस्क्यू टीमों को सुरक्षित दूरी पर हटाया है और नेपाल में भी नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है।
फिलहाल दोनों देशों की एजेंसियां पानी के स्तर और झील की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बचाव अभियान दोबारा कब शुरू होगा, यह स्थिति सामान्य होने और खतरा कम होने पर तय किया जाएगा।