बंगाल के मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी, चार नए मेडिकल कॉलेजों से मिलेंगी 400 अतिरिक्त सीटें
Kolkata: पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य के चार जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, जिससे मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को नया विस्तार मिलेगा. इन नए संस्थानों के शुरू होने के बाद एमबीबीएस की 400 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी. सरकार ने कालिम्पोंग, अलीपुरदुआर, उत्तर दिनाजपुर और पश्चिम बर्धमान में नये सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव रखा गया है और इसके लिए उपयुक्त भूमि चिह्नित कर केंद्र सरकार को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भेजने की तैयारी है.
राज्य सरकार का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से न केवल डॉक्टरों की कमी दूर होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बेहतर होगी. नए कॉलेजों के निर्माण और आवश्यक बुनियादी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पश्चिम बंगाल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीएमएससीएल) ने संबंधित जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमओएच) से उपलब्ध भूमि का विस्तृत ब्योरा मांगा है. 18 जून को जारी निर्देश के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुरूप मेडिकल कॉलेज, संबद्ध शिक्षण अस्पताल और छात्रावास की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि और आधारभूत संरचना का चयन किया जायेगा. यदि जगह की कमी हो तो अस्पताल से 10 किलोमीटर के दायरे में राज्य सरकार की लगभग 20 एकड़ भूमि की पहचान कर उसका प्रस्ताव भेजना होगा.
निर्देश में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज और शिक्षण अस्पताल एक ही परिसर या अधिकतम दो परिसरों में स्थापित किये जा सकते हैं. यदि दो परिसर होंगे, तो उनके बीच की दूरी 10 किलोमीटर से अधिक ना हो. साथ ही मेडिकल कॉलेजों में कम से कम 420 बेड और पूरे वर्ष औसतन 80 प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी अनिवार्य होगी. जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को पहले यह जांचने के लिए कहा गया है कि मौजूदा अस्पताल परिसर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है या नहीं. एक से अधिक उपयुक्त भूखंड मिलने पर उनकी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल शिक्षा में बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. इससे राज्य के छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के अधिक अवसर मिलेंगे और बाहर के राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने से चिकित्सा शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.