फर्जी दिव्यांग कार्ड से नौकरी तक का खेल! नौकरी के नाम पर ठगी, सिस्टम की सांठगांठ पर बड़े सवाल

Fathehpur: फर्जी दिव्यांग कार्ड बनाने से लेकर नौकरी के नाम पर ठगी तक के मामले ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि पहले कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र या कार्ड का इस्तेमाल किया गया और इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूले गए.
 

Fathehpur: थरियांव थाना क्षेत्र में एक ही आरोपी और उसके परिवार से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा और ठगी का मामला सामने आया है। सुमित सिंह पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र और कार्ड बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया और सरकारी धन का आहरण किया। वहीं, उस पर पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने का भी आरोप है।

मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और कथित तौर पर निकाली गई सरकारी धनराशि की वसूली की मांग की है।

अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप

ग्राम गडरियनपुर, मजरे मुरांव निवासी राधेश्याम पाल, जो स्वयं दिव्यांग हैं, ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि रामपुर थरियांव निवासी सुमित सिंह ने अपने परिवार के सदस्यों सुनीता, अर्जुन सिंह और ज्ञान सिंह के साथ मिलकर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सामान्य और ओबीसी वर्ग से होने के बावजूद संबंधित लोगों ने कथित तौर पर दिव्यांग कल्याण विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं कार्ड बनवाए और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस प्रक्रिया में कथित रूप से लाखों रुपये की सरकारी धनराशि का आहरण किया गया।

6 मई 2025 को निरस्त हुए दिव्यांग कार्ड

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने 6 मई 2025 को संबंधित लोगों के दिव्यांग कार्ड निरस्त कर दिए थे। जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से कथित तौर पर यह निर्देश भी दिया गया था कि एक सप्ताह के भीतर अवैध रूप से आहरित राशि जमा नहीं किए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्देश के बावजूद कई महीने बीत गए, लेकिन कथित रूप से न तो राशि की रिकवरी हुई और न ही आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। इसको लेकर विभागीय कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

नौकरी दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपये लेने का आरोप

फर्जी दिव्यांग कार्ड के आरोपों के बीच सुमित सिंह पर पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का भी मामला सामने आया है।

घोरहा निवासी रामू के अनुसार, वर्ष 2023 में आरोपी ने उनके बेटे को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 2.50 लाख रुपये लिए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इनमें 40 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए, जबकि 2.10 लाख रुपये नकद दिए गए थे।

आरोप है कि रकम देने के बावजूद न तो नौकरी मिली और न ही पैसे वापस किए गए।

आठ लोगों से ठगी का पुलिस में मुकदमा

पुलिस जांच के हवाले से बताया गया है कि सुमित सिंह पर केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कुल आठ लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।

पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर भी कार्रवाई की बात कही है।

सरकारी धन और नौकरी ठगी के आरोप से बढ़ा आक्रोश

एक ही आरोपी पर सरकारी योजनाओं का कथित गलत लाभ लेने और बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने के आरोप सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

फिलहाल पुलिस नौकरी के नाम पर ठगी के मुकदमे की जांच कर रही है, जबकि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र और कथित सरकारी धन के आहरण से जुड़े आरोपों में संबंधित विभागीय कार्रवाई और रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।