Gandhi Jayanti: गांधीजी की हत्या से 10 दिन पहले क्या हुआ था? 30 जनवरी 1948 का वो आखिरी दिन...
Gandhi Jayanti 2026: देशभर में 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के विचारों को अपने जीवन का आधार बनाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, गांधीजी के अहिंसक प्रतिरोध और सत्याग्रह ने न केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया के कई नागरिक अधिकार आंदोलनों पर भी असर डाला।
गांधी जयंती के मौके पर उनके जीवन, विचारों और 30 जनवरी 1948 को हुई हत्या को याद किया जाता है। उनकी मृत्यु को लेकर समय-समय पर कई तरह के दावे और चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनकी हत्या की घटना और उसके घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से दर्ज करते हैं।
सत्य और अहिंसा को बनाया जीवन का आधार
महात्मा गांधी के सार्वजनिक जीवन के केंद्र में सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और स्वदेशी जैसे विचार रहे। दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव का सामना करने के बाद उनके राजनीतिक और सामाजिक विचारों को नई दिशा मिली। भारत लौटने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसक प्रतिरोध को प्रमुख माध्यम बनाया।
1930 का दांडी मार्च उनके आंदोलनों में सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रहा। उन्होंने नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक करीब 240 मील की यात्रा की थी।
गांधीजी के विचारों का मूल संदेश था कि संघर्ष का रास्ता हिंसा के बजाय सत्य और अहिंसा पर आधारित होना चाहिए। यही वजह है कि आज भी उनके विचार भारत के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हत्या से पहले भी हुआ था जानलेवा हमला
गांधीजी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई, लेकिन इससे पहले भी उनकी जान लेने की कोशिश की गई थी। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस में उनकी प्रार्थना सभा के दौरान विस्फोट हुआ था।
इसके बावजूद गांधीजी ने अपने सार्वजनिक कार्यक्रम और प्रार्थना सभाएं जारी रखीं। आधिकारिक ऐतिहासिक विवरणों में 20 जनवरी की घटना को उनकी हत्या से पहले के महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में दर्ज किया गया है।
30 जनवरी 1948 को क्या हुआ था?
30 जनवरी 1948 गांधीजी के जीवन का आखिरी दिन था। गांधी स्मृति के रिकॉर्ड के मुताबिक, उस दिन भी उनका दिन नियमित गतिविधियों से शुरू हुआ। उन्होंने सुबह प्रार्थना की और दिन में कई लोगों से मुलाकात की।
शाम को वे प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे। उनके साथ मनु गांधी और आभा गांधी थीं। जैसे ही वे प्रार्थना स्थल की ओर बढ़े, एक हमलावर ने करीब से उन पर तीन गोलियां चलाईं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, गांधीजी शाम 5 बजकर 17 मिनट पर अंतिम सांस ली।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, गांधीजी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी।
क्या गांधीजी ने आखिरी समय में कहा था ‘हे राम’?
गांधीजी के आखिरी शब्दों को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के आधिकारिक विवरण में कहा गया है कि गोली लगने के बाद गांधीजी के मुंह से “हे राम, हे राम” शब्द निकले। इसी वजह से ‘हे राम’ उनके जीवन के अंतिम क्षणों से जुड़ा सबसे चर्चित वाक्य बन गया।
हालांकि, इस घटना के अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं। इसलिए इस दावे को प्रस्तुत करते समय आधिकारिक गांधी स्मृति के रिकॉर्ड का उल्लेख करना अधिक उचित है।
मौत से जुड़ा ‘रहस्य’ कितना सच?
गांधीजी की मौत को लेकर समय-समय पर कई सवाल और तरह-तरह के दावे सामने आते रहे हैं। लेकिन उनकी हत्या को लेकर उपलब्ध सरकारी ऐतिहासिक रिकॉर्ड इसे किसी अनसुलझे रहस्य के तौर पर पेश नहीं करते।
रिकॉर्ड में 20 जनवरी 1948 के बम विस्फोट, 30 जनवरी की प्रार्थना सभा और गोलीबारी की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। गांधी स्मृति के अनुसार, 30 जनवरी को बिड़ला हाउस के प्रार्थना स्थल पर ही गांधीजी पर गोलियां चलाई गई थीं।
इसलिए गांधीजी की मृत्यु को “आज तक अनसुलझा रहस्य” कहना ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं होगा। हां, उनकी हत्या से जुड़े घटनाक्रम और अंतिम क्षणों को लेकर लोगों के बीच जिज्ञासा आज भी बनी हुई है।
गांधीजी के विचार आज भी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
गांधीजी का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं था। सत्य, अहिंसा, सामाजिक सद्भाव, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता जैसे उनके विचार उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से रहे।
गांधीजी की विरासत को याद करते हुए गांधी स्मृति में उनके अंतिम 144 दिनों की स्मृतियां संरक्षित हैं। नई दिल्ली स्थित पुराना बिड़ला हाउस, जहां उन्होंने जीवन के अंतिम महीने बिताए और जहां 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हुई, आज गांधी स्मृति के रूप में संरक्षित है।
2 अक्टूबर सिर्फ जन्मदिन नहीं, विचारों को याद करने का दिन
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उस व्यक्ति को याद करने का अवसर है जिसने सत्य और अहिंसा को राजनीतिक संघर्ष का महत्वपूर्ण हथियार बनाया। गांधीजी का जीवन कई उपलब्धियों, संघर्षों और विवादों से भरा रहा, लेकिन उनके विचारों का प्रभाव भारत और दुनिया के इतिहास में दर्ज है।
गांधीजी के जीवन का संदेश उनके अपने शब्दों में यही था कि व्यक्ति के विचार और कर्म ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनते हैं।