ग्लेशियर फटा और मची तबाही! नेपाल में हाहाकार, कई लोग लापता
National: उत्तरी नेपाल की भोटे कोशी नदी में बुधवार को अचानक बाढ़ आने से रसुवा जिले के तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में भारी तबाही मच गई। बाढ़ के तेज बहाव में कई घर, वाहन, पुल और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं और कई लोगों के लापता होने की खबर है।
अधिकारियों के मुताबिक, नदी का जलस्तर स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे अचानक बढ़ गया। शुरुआती जानकारी में बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आने की आशंका जताई गई है। हालांकि, बाढ़ के कारणों और नुकसान की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
कितने लोग लापता हैं?
उत्तरी रसुवा में तिब्बत सीमा के पास एक सीमा चौकी पर तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) के चार जवान अचानक आई बाढ़ के बाद लापता बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर हैं। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक कुल लापता लोगों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है।
प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में आकलन और खोजबीन का काम जारी है। ऐसे में लापता लोगों की संख्या बढ़ या घट सकती है।
भोटेकोसी नदी रसुवामा तिब्बत तर्फबाट ठुलो बाढी प्रवेश गरेकोले अर्को सूचना नआउँदासम्म त्रीशुली नदीको तटिय क्षेत्रका जिल्लाहरु नुवाकोट, धादिङ, चितवन, गोरखा लगायतका स्थानहरूमा उच्च सतर्कता सहित सुरक्षित स्थानमा रहन अनुरोध छ। pic.twitter.com/Zun6icZZCM
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) August 26, 2026
15 हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ का असर नेपाल के हाइड्रो पावर सेक्टर पर भी पड़ा है। नेपाल स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से रसुवा क्षेत्र में करीब 15 हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
इनमें से 10 परियोजनाएं चालू थीं, जबकि 5 परियोजनाएं निर्माणाधीन थीं। बाढ़ के कारण परियोजनाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
तिमुरे और स्याब्रुबेसी सबसे ज्यादा प्रभावित
बाढ़ से रसुवा जिले के तिमुरे और स्याब्रुबेसी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। ये इलाके तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित हैं।
नेपाल सेना के अनुसार, इन क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ है। बाढ़ के तेज बहाव में वाहन, व्यावसायिक सामान और अन्य संपत्तियां बह गईं। सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान भी पानी की चपेट में आ गए।
हाल ही में बनाया गया एक पुल भी बाढ़ के तेज बहाव में नष्ट हो गया।
प्रशासन ने भारी नुकसान की जताई आशंका
रसुवा जिले के प्रशासन अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने भारी जान-माल के नुकसान की आशंका जताई, लेकिन कहा कि फिलहाल नुकसान की निश्चित जानकारी देना संभव नहीं है।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की टीमें प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटा रही हैं। इसके बाद ही बाढ़ से हुए कुल नुकसान का आकलन सामने आ सकेगा।
करीब 50 हजार की आबादी वाला पहाड़ी जिला है रसुवा
तिब्बत की सीमा से सटा रसुवा जिला काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित है। पहाड़ी क्षेत्र में बसे इस जिले की आबादी करीब 50 हजार बताई जाती है। भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने यहां परिवहन, सीमा व्यापार और ऊर्जा परियोजनाओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
पांच जिलों के लोगों को अलर्ट
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने कई जिलों के नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा जिलों में नदी तट के आसपास रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की अपील की है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना, लापता लोगों की तलाश करना और नुकसान का आकलन करना है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों से पूरी जानकारी आने के बाद ही इस प्राकृतिक आपदा में हुए वास्तविक नुकसान और संभावित हताहतों की तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।