UPPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन, दिल्ली की नेहा सिंह को मिला 5वां स्थान, गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न का माहौल...
National: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा में दिल्ली की नेहा सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में 5वां रैंक हासिल किया है. जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, यह खबर उनके पैतृक गांव तक पहुंचते ही खुशी की लहर दौड़ गई. गांव में ढोल-नगाड़े बजे, मिठाइयां बांटी गईं और हर कोई नेहा की इस बड़ी उपलब्धि पर गर्व करता नजर आया.
मेहनत और लगन की मिसाल बनीं नेहा सिंह
नेहा सिंह की सफलता को गांव और परिवार के लोग कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का नतीजा बता रहे हैं. बताया जा रहा है कि नेहा ने सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार पढ़ाई जारी रखी और कई असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानी. उन्होंने अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुनियोजित रणनीति, नियमित अध्ययन और आत्ममंथन के जरिए यह मुकाम हासिल किया.
गांव में जश्न का माहौल
रिजल्ट के बाद गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. बुजुर्गों ने नेहा को आशीर्वाद दिया तो युवाओं और छात्र-छात्राओं ने उन्हें अपनी प्रेरणा बताया. गांव वालों का कहना है कि नेहा की सफलता से अब अन्य बच्चे भी प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित होंगे.
परिवार ने क्या कहा?
नेहा के परिजनों ने कहा कि बेटी की इस उपलब्धि ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. उन्होंने बताया कि नेहा शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती रही हैं और प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ करने का सपना देखती रही हैं. परिवार ने इस सफलता का श्रेय नेहा की मेहनत के साथ-साथ शिक्षकों और शुभचिंतकों के मार्गदर्शन को भी दिया. वहीं इस दौरान पिता ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि मुझे बेहद खुशी हो रही है मेरा पूरा परिवार उत्साहित है कि मेरी बेटी ने इतनी बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की है. मेरी बेटी कई-कई घंटे तक लगातार रोजाना पढ़ाई करती थी और आज उसकी मेहनत का यह नतीजा है कि पूरा परिवार ही नहीं पूरे गांव को गौरव महसूस कराया है.
युवाओं के लिए बनीं रोल मॉडल
नेहा सिंह की सफलता खास तौर पर उन छात्रों के लिए प्रेरणादायक है, जो सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही दिशा में मेहनत, धैर्य और निरंतर अभ्यास से बड़ी से बड़ी परीक्षा भी पास की जा सकती है.
UPPSC परीक्षा का महत्व
Uttar Pradesh Public Service Commission द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. इसमें चयन के बाद उम्मीदवारों को प्रशासनिक और राजपत्रित पदों पर नियुक्ति मिलती है, जहां वे सीधे तौर पर शासन-प्रशासन में अहम भूमिका निभाते हैं.
मुखर्जी नगर से ली कोचिंग
नेहा सिंह ने बताया कि वहीं असली तैयारी का बेस यूपीएससी की परीक्षा के दौरान हो गया था जिसके लिए मुखर्जी नगर से क्लास ली थी और साथ ही कई ऑनलाइन क्लास के माध्यम से भी तैयारी की थी. नेहा कहती हैं कि जब मैं तैयारी कर रही थी तब मेरे लिए यह तैयारी करना आसान नहीं था सोसाइटी का प्रेशर था क्योंकि मैं जिस माहौल में पली बढ़ी हूं वहां लड़कियों को ज्यादा बढ़ावा नहीं मिलता लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे पूरी फ्रीडम दी पढ़ने की. जब बोर हुए तो अपने कजिन के साथ बात कर लेते थे जब दिल दुखी हुआ तो दोस्तों के साथ बात कर लिया करते किसी चीज की जरूरत पड़ी तो माता-पिता ने उस जरूरत को पूरा किया इसलिए मेरे लिए सभी का सपोर्ट रहा जिसके वजह से आज यह मुकाम हासिल कर पाई हूं.
वहीं पिता ओमवीर सिंह बताते हैं कि मुझे जब रिजल्ट का पता लगा कि मेरी बेटी कामयाब हो गई है. वह पास हो गई है तब से मैं बहुत खुश हूं मुझे अपनी बेटी के मेहनत पर पूरा विश्वास था क्योंकि वह कई घंटे की पढ़ाई करती थी जब भी हम लोग देखते थे वह पढ़ती रहती थी. आज उसकी मेहनत रंग लाई है. बेटी का स्वागत पूरे गांव के लोगों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया. वही नेहा सिंह की मां ने कहा कि मैं अपनी बेटी की कामयाबी पर बहुत खुश हूं कि मेरी बेटी इतनी बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की है मेरी घर में पांच बेटियां है और मैं चाहती हूं कि मेरी सभी बेटी इसी तरह कामयाबी हासिल करें.
आगे की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, नेहा सिंह अब इंटरव्यू और आगे की प्रक्रियाओं के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर रही हैं. उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें सेवा का मौका मिला, तो वे ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ जनता की सेवा करना चाहेंगी.
वहीं नेहा सिंह ने सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही लड़कियों के लिए भी संदेश दिया है कि आज के समय में लड़कियों को लड़कों के बराबरी करने का मौका मिला है इसलिए अपना फुल फोकस अपने प्रिपरेशन पर रखे और परीक्षा की भूमिका को देखते हुए उसकी तैयारी करें उन्हें कामयाबी जरूर मिलेगी.
नेहा सिंह की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार या गांव के लिए, बल्कि देशभर के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए यह संदेश है कि सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने की हिम्मत भी उतनी ही मजबूत हो.