विपक्ष के नेता को हटाने की कोशिश पर हाई कोर्ट की रोक, ऋतब्रता बनर्जी के पक्ष में आया फैसला

Kolkata: इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा- फिलहाल विपक्षी दल के विधायकों के चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा.
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक और बड़ा सियासी झटका लगा है. हाई कोर्ट ने गुरुवार को टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल विधानसभा स्पीकर का निर्णय लागू रहेगा.

इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा- फिलहाल विपक्षी दल के विधायकों के चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. इसलिए, ऋतब्रता बनर्जी विपक्ष की नेता बनी रहेंगे. हालांकि, मामले का निपटारा अभी नहीं हुआ है. मामले की सुनवाई 18 जुलाई को फिर से होगी. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सभी पक्षों को हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शोभनदेव की ओर से दायर मुकदमा पर गुरुवार को सुनवाई की. न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में पिछले दो दिनों से इस मामले की सुनवाई चल रही थी. हालांकि, विपक्ष के नेता का फैसला टाल दिया गया. गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी को राहत दी और पद पर बने रहने का आदेश दिया. इस बीच, विधानसभा का बजट सत्र आज फिर से शुरू हो गया है. सत्र शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले आया यह निर्देश अत्यंत महत्वपूर्ण है.

क्या था मामला

बल्लीगंज विधायक शोभनदेव चटर्जी को तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा था. वहीं दूसरी ओर, एंटाली विधायक संदीपान साहा ने 58 विधायकों के समर्थन से कहा कि उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाया जाना चाहिए. विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बसु ने ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया. अध्यक्ष के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए.

विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखर गई. ममता बनर्जी की टीएमसी अब दो गुटों में बंट गई है. एक गुट ममता बनर्जी के पक्ष में है, तो दूसरा गुट ऋतब्रता बनर्जी के ‘बागी गुट’ के पक्ष में. हस्ताक्षर जालसाजी के एक मामले ने बंगाल में तृणमूल के भविष्य पर अनिश्चितता का बादल ला दिया है. हस्ताक्षर जालसाजी का मामला सामने आते ही तृणमूल में फूट पड़ गई. अदालत ने कहा- फिलहाल विपक्षी दल के विधायकों के चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है. हालांकि, इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को फिर से होगी.