काशी को मिलेगा शानदार नमो ब्रिज! 6 लेन सड़क के नीचे बिछेंगी 4 रेलवे लाइनें
Varanasi: धार्मिक नगरी काशी को जल्द ही आधुनिक परिवहन की एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। गंगा नदी पर बन रहे ट्रांस-गंगा कॉरिडोर को अब 'नमो ब्रिज' के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने काशी रेलवे स्टेशन और निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण करने के बाद परियोजना की खासियतों की जानकारी दी। यह पुल अपनी अनोखी बनावट के कारण खास होने वाला है। इसके ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क होगी, जबकि निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक बिछाए जाएंगे। यानी एक ही पुल से सड़क और रेल दोनों का आवागमन संभव हो सकेगा।
एक पुल पर सड़क और रेलवे का अनोखा संगम
नमो ब्रिज का निर्माण नमो घाट के पास किया जा रहा है। इसे डबल डेकर हाइब्रिड ब्रिज के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी ऊपरी मंजिल पर छह लेन की सड़क बनाई जाएगी, जिससे वाहनों की आवाजाही आसान होगी। वहीं, निचले हिस्से में चार रेलवे लाइनें होंगी, जिनसे ट्रेनों का परिचालन किया जा सकेगा।
इस तरह यह परियोजना सड़क और रेलवे नेटवर्क को एक ही संरचना में जोड़ने वाली आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण बनेगी। इससे वाराणसी में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
अगले 100 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ डिजाइन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, नमो ब्रिज का डिजाइन अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ वर्तमान यातायात को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले यात्रियों और वाहनों की संख्या के हिसाब से भी व्यवस्था तैयार करना है।
इस पुल के तैयार होने के बाद वाराणसी के परिवहन ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। सड़क और रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे शहरों से आने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिल सकती है।
काशी रेलवे स्टेशन से जुड़ेगा नमो ब्रिज
इस परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता नमो ब्रिज का काशी रेलवे स्टेशन से जुड़ाव है। काशी रेलवे स्टेशन को भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। पुल और स्टेशन के बीच बेहतर कनेक्टिविटी से रेलवे परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
इससे ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ यात्रियों की आवाजाही को भी सुगम बनाने की योजना है। रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और नमो ब्रिज के निर्माण से वाराणसी के रेल नेटवर्क को नया विस्तार मिलेगा।
बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों तक कनेक्टिविटी होगी मजबूत
नमो ब्रिज का लाभ केवल वाराणसी तक सीमित नहीं रहने वाला है। इस परियोजना से बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले रेल नेटवर्क को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वाराणसी देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्रों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को आने-जाने में सहूलियत मिल सकती है। खासकर बिहार और पूर्वोत्तर की ओर यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पर्यटन और व्यापार को भी मिलेगा फायदा
गंगा पर बन रहा नमो ब्रिज वाराणसी की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है। इसके निर्माण से शहर के परिवहन नेटवर्क को आधुनिक बनाने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बेहतर कनेक्टिविटी से काशी विश्वनाथ मंदिर, घाटों और दूसरे धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले पर्यटकों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। इसके अलावा सड़क और रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में नमो ब्रिज वाराणसी की आधुनिक पहचान का एक प्रमुख हिस्सा बन सकता है।