Excise Policy Case में केजरीवाल और सिसोदिया ने रखा पक्ष, CBI की चुनौती को खारिज करने की मांग

New Delhi: दिल्ली के कथित आबकारी नीति घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अपना जवाब दाखिल किया है. दोनों नेताओं ने मामले में CBI की अपील को खारिज करने की मांग की है. केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल जवाब में CBI की ओर से की गई चुनौती का विरोध किया गया है. अब इस मामले में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई करेगी.
 
 

New Delhi: दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका का विरोध किया है। CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मामले के सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया गया था। केजरीवाल और सिसोदिया ने अदालत से CBI की याचिका खारिज करने की मांग की है। इस मामले पर जस्टिस मनोज जैन की अदालत में 18 अगस्त को सुनवाई होनी है।

‘CBI की याचिका सुनवाई योग्य नहीं’

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि CBI की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। दोनों नेताओं का दावा है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के महज चार घंटे बाद ही CBI ने याचिका दाखिल कर दी थी।

उन्होंने इसे असाधारण जल्दबाजी में दाखिल की गई याचिका बताते हुए कहा कि इसमें गंभीरता का अभाव है। उनका यह भी कहना है कि CBI की अर्जी में ट्रायल कोर्ट के फैसले में हुई किसी विशिष्ट कानूनी या तथ्यात्मक गलती को स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। ऐसे में उनके मुताबिक CBI की चुनौती पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

18 अगस्त को होगी सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को CBI की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अंतिम मौका दिया था। अब इस मामले की सुनवाई 18 अगस्त को जस्टिस मनोज जैन करेंगे।

इससे पहले मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से उस पीठ के समक्ष सुनवाई को लेकर आपत्ति जताई गई थी। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से अलग होने का अनुरोध भी किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी

दरअसल, 27 फरवरी को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया था। ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट में कई विरोधाभासों का उल्लेख किया था।

अदालत ने कहा था कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में पेश किए गए कई तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। इसी आधार पर अभियोजन के मामले पर सवाल उठाते हुए अदालत ने आरोपियों को बरी किया था।

सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे

ट्रायल कोर्ट के आदेश में आरोपियों की हिरासत की अवधि का भी उल्लेख किया गया था। अदालत के मुताबिक, मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे, जबकि अरविंद केजरीवाल अलग-अलग अवधि में कुल 156 दिन जेल में रहे।

केजरीवाल को CBI के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद 13 सितंबर 2024 को रिहा किया गया था।

अब हाईकोर्ट में CBI की चुनौती पर फैसला

अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल CBI की याचिका की सुनवाई योग्यता और ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है। 18 अगस्त की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। इसके बाद यह तय होगा कि CBI की चुनौती पर आगे सुनवाई होगी या नहीं।

फिलहाल केजरीवाल और सिसोदिया ने CBI की याचिका को खारिज करने की मांग की है, जबकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगी।