4 साल तक नहीं हुई मां दुर्गा की पूजा! अब पहली बार मिला ₹1 लाख का अनुदान
Nalhati, West Bengal: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के कांगला पहाड़ी गांव में दुर्गापूजा को लेकर इस वर्ष खास उत्साह देखने को मिल रहा है। लंबे समय से सरकारी पूजा अनुदान से वंचित रहने का दावा करने वाली गांव की सार्वजनिक श्री श्री मां अन्नपूर्णा क्लब पूजा समिति को पहली बार एक लाख रुपये की सरकारी सहायता मिली है। अनुदान का चेक मिलने के बाद समिति के सदस्यों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, नलहाटी थाना क्षेत्र की 326 दुर्गापूजा समितियों को अनुदान देने की प्रक्रिया के तहत कांगला पहाड़ी गांव की समिति को भी सहायता राशि दी गई है। इसे गांव की पूजा समिति के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
चार साल तक पूजा आयोजन में आई थी बाधा
कांगला पहाड़ी गांव में दुर्गापूजा का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है। आरोप है कि पिछली तृणमूल सरकार के कार्यकाल में निर्देशों की अवहेलना के कारण गांव में लगातार चार वर्षों तक दुर्गापूजा का आयोजन नहीं हो सका था। इस दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा पूजा मंडप में ही रखी रही।
हालांकि, ग्रामीणों और पूजा समिति के सदस्यों ने पूजा दोबारा शुरू कराने की कोशिश जारी रखी। आखिरकार, वर्ष 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच गांव में दुर्गापूजा का आयोजन फिर से शुरू हुआ।
पहली बार मिला सरकारी अनुदान
पूजा दोबारा शुरू होने के बाद भी समिति का दावा था कि उसे लंबे समय तक सरकारी अनुदान का लाभ नहीं मिला। ऐसे में पहली बार एक लाख रुपये की सहायता राशि मिलने से आयोजकों को बड़ी राहत मिली है।
पूजा समिति के सदस्य चंदन साउ ने कहा कि अनुदान मिलने से गांव के लोग और समिति के सदस्य बेहद खुश हैं। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रति आभार जताया।
मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी अंतिम चरण में
कांगला पहाड़ी गांव में दुर्गापूजा की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा को रंग देने का काम चल रहा है, जबकि पूजा मंडप को सजाने की तैयारियां भी की जा रही हैं।
समिति के सदस्यों ने आसपास के गांवों के लोगों से कांगला पहाड़ी पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने और पूजा में शामिल होने की अपील की है।
ग्रामीणों के लिए भावनात्मक है इस बार की पूजा
कांगला पहाड़ी गांव में इस बार की दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष के बाद मिली खुशी का अवसर भी है। चार साल तक पूजा नहीं हो पाने और फिर अदालत के निर्देश पर आयोजन दोबारा शुरू होने के इतिहास के बीच पहली बार सरकारी अनुदान मिलना समिति के लिए खास महत्व रखता है।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस वर्ष मां दुर्गा का उत्सव पहले से अधिक उत्साह और सामूहिक भागीदारी के साथ मनाया जाएगा।