रविवार से शुरू होगा मलमास, 15 जून तक शादी-विवाह और सभी मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक
Malmas Date: हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार से मलमास (अधिक मास/पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा. इस अवधि में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे.
पंडितों और धर्माचार्यों के मुताबिक मलमास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. इस दौरान शुभ कार्यों की बजाय पूजा-पाठ, जप-तप, व्रत और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी होता है. इसी कारण शास्त्रों में इस माह को आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ बताया गया है.
इस बार अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है. इस कारण यह पक्ष पूरे 15 दिनों का रहेगा. 18 मई 2026 को चंद्र दर्शन होगा. इसी दिन से दशमी तिथि तक काशी के दशाश्वमेध तीर्थ में विशेष स्नान की परंपरा शुरू होगी. 20 मई 2026 को गणेश चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. वहीं 26 मई 2026 को हस्त नक्षत्र में गंगा दशहरा मनाया जाएगा. इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व माना गया है. खास बात यह है कि इस वर्ष गंगा दशहरा दो बार मनाया जाएगा, क्योंकि यह अधिक मास में भी पड़ रहा है.
पुरुषोत्तम एकादशी और प्रदोष व्रत का महत्व
27 मई को पुरुषोत्तम एकादशी व्रत रखा जाएगा. इसके अगले दिन 28 मई को एकादशी व्रत का पारण और प्रदोष व्रत किया जाएगा. 30 मई को व्रत पूर्णिमा और 31 मई को स्नान-दान की पूर्णिमा मनाई जाएगी. 31 मई को दोपहर 1:02 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी. धार्मिक दृष्टि से पूर्णिमा और स्नान-दान का इस दिन विशेष महत्व माना गया है.
1 जून से शुरू होगा कृष्ण पक्ष
अधिक ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष 1 जून से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा. 1 जून को दोपहर 3:03 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी. यह पक्ष भी पूरे 15 दिनों का होगा. 4 जून को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. 11 जून को पुरुषोत्तम एकादशी व्रत होगा. इसके बाद 12 जून को प्रदोष व्रत और 13 जून को मासिक शिवरात्रि व्रत मनाया जाएगा.
सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व
14 जून को श्रद्धा की अमावस्या होगी, जबकि 15 जून को स्नान-दान की सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 जून को सुबह 8:45 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी. उदयकाल में अमावस्या तिथि मिलने के कारण इस दिन स्नान और दान का विशेष पुण्य फल प्राप्त होगा. इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी हो जाएगा. इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी.
16 जून से शुरू होगा शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा. इस पक्ष में द्वितीया तिथि का क्षय होने के कारण यह पक्ष 14 दिनों का रहेगा. इसका समापन 29 जून को होगा. 29 जून को स्नान-दान और व्रत पूर्णिमा के साथ दक्षिण भारतीय महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत की पूजा भी की जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं.