Mamata Banerjee Bangladesh Statement: हाईकोर्ट ने खारिज की PIL! ममता के बयान पर क्या बोला कोर्ट?

Kolkata:  बांग्लादेश से जुड़े बयान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दायर जनहित याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। राज्य की रिपोर्ट में कहा गया कि ममता बनर्जी के बयान में कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता.
 

Kolkata: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बांग्लादेश से जुड़े बयान के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने की। अदालत का फैसला राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें कहा गया कि ममता बनर्जी के बयान में कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।

राज्य सरकार की रिपोर्ट के बाद याचिका खारिज

इस मामले में अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान, 1 सितंबर 2026 को राज्य सरकार से ममता बनर्जी के बयान के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। बुधवार को सरकार ने रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की।

रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित बयान में किसी संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व नहीं पाए गए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया।

अभ्रतनु सरकार ने दायर की थी PIL

यह जनहित याचिका अभ्रतनु सरकार ने दायर की थी। याचिका ममता बनर्जी के 2 जून को धर्मतला में दिए गए बयान से जुड़ी थी।

इससे पहले 1 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने याचिका की ग्राह्यता और उसके आधार को लेकर सवाल उठाए थे। उस समय तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की पीठ ने राजनीतिक या सार्वजनिक मंच से दिए गए बयानों को लेकर अदालत की भूमिका और PIL की maintainability पर सवाल किए थे।

2 जून को ममता बनर्जी ने क्या कहा था?

विवाद की शुरुआत 2 जून 2026 को धर्मतला के वाई चैनल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी के बयान से हुई थी। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए बांग्लादेश से जुड़े एक मामले का जिक्र किया था।

ममता बनर्जी ने कहा था कि बांग्लादेश का एक बड़ा अपराधी मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल में दाखिल हुआ था और राज्य की STF ने उसे गिरफ्तार किया। उन्होंने यह भी कहा था कि इस कार्रवाई के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने उनसे फोन पर बात की थी।

उन्होंने कथित तौर पर नाम सार्वजनिक नहीं करने की वजह यह बताई थी कि इससे बांग्लादेश में लोगों के बीच उत्तेजना पैदा हो सकती है और उन्होंने देशहित का हवाला देते हुए नाम नहीं लेने की बात कही थी।

किस व्यक्ति का जिक्र था, इस पर बनी रही अटकलें

ममता बनर्जी ने अपने बयान में संबंधित व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। हालांकि, बाद में कुछ रिपोर्टों और सार्वजनिक चर्चाओं में उनके बयान को बांग्लादेशी युवा नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या से जोड़कर देखा गया। यह एक मीडिया/सार्वजनिक व्याख्या थी; ममता बनर्जी ने अपने भाषण में व्यक्ति का नाम नहीं लिया था।

कोर्ट ने PIL की ग्राह्यता पर पहले भी उठाए थे सवाल

1 सितंबर की सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस PIL की maintainability पर सवाल उठाए थे। अदालत ने यह भी पूछा था कि सार्वजनिक सभा में किसी व्यक्ति के दिए हर बयान को लेकर क्या अदालत में जनहित याचिका लाई जानी चाहिए।

अब राज्य सरकार की रिपोर्ट में संज्ञेय अपराध नहीं पाए जाने के बाद अदालत ने इस PIL को खारिज कर दिया।

मामले में अब क्या हुआ?

16 सितंबर को अदालत के आदेश के साथ इस PIL की कार्यवाही समाप्त हो गई। यानी ममता बनर्जी के उक्त बयान को लेकर दायर इस विशेष जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने आगे की न्यायिक कार्रवाई का आधार नहीं माना।